उत्तर भारत के ऐतिहासिक शक्ति पीठ श्री माता मनसा देवी के 200 वर्ष

पंचकूला, 8 जुलाई-                हरियाणा सरकार ने उत्तर भारत के ऐतिहासिक शक्ति पीठ श्री माता मनसा देवी के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष को एक भव्य तरीके से मनाने का निर्णय लिया है तथा इस कड़ी में हर महीने कोई न कोई धार्मिक कार्यक्रम करने तथा मंदिर के मुख्य गुंबज के अंदर स्वर्ण परत चढा कर मंदिर को एक नया रूप दिया जाएगा।
यह निर्णय आज यहां सैक्टर एक स्थित रैडबिशप में मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई श्री माता मनसा देवी पूजा स्थल बोर्ड की 16वीं आम बैठक में लिया गया। बैठक में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन, राज्य मंत्री व बोर्ड के सदस्य ज्ञानचंद गुप्ता, मुख्य सचिव श्री डी0एस0 ढेसी, मुख्य मंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, कालका की विधायक एवं बोर्ड की सदस्या लतिका शर्मा, बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी०जे० गोयल, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव अनिल कुमार के अलावा बोर्ड के सभी ऐसोसिएट सदस्य तथा गैर सरकार सदस्य उपस्थित थे।
बैठक में पंचकूला की उपायुक्त एवं बोर्ड की सदस्य सचिव डॉ० गरिमा मित्तल ने एजेंडा प्रस्तुत किया, जिसे बोर्ड ने पारित कर दिया। बैठक में  इस बात का निर्णय लिया गया कि 200वें साल के उपलक्ष में इस बार के नवरात्र मेले में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को आमंत्रित किया जाए। इस पर बोर्ड के अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस संबंध में अधिकारियों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आमंत्रित करने के लिए तत्काल पत्र लिखने के निर्देश दिये, ताकि प्रधानमंत्री की व्यस्तताओं के चलते कार्यक्रम  के लिए पहले से समय मिल सके। इसके अलावा उन्होंने 200वें साल के उपलक्ष में एक विशेष डाक टिकट जारी करने के लिए केन्द्रीय डाक मंत्रालय को पत्र लिखने को कहा। मुख्यमंत्री ने इस वर्ष के  सभी मासिक कार्यक्रमों  पूर्णिमा या अमावस्या के दिन विशेष रूप से आयोजित करने को कहा।
बैठक में वर्ष 2016-17 के लिए 18 करोड़ 87 लाख 89 हजार 67 रूपए का बजट पारित किया गया। वर्ष 2015-16 के  दौरान बोर्ड को 18 करोड़ 24 लाख 11 हजार 703 करोड़ रूपए की प्राप्ति हुई थी और 9 करोड़ 32 लाख 68 हजार 363 रूपए की राशि खर्च हुई थी। बैठक में इस बात का निर्णय लिया गया कि मंदिर में चढावे के रूप में प्राप्त बर्तन, पंखे इत्यादि आईटम आवश्यक्तानुसार आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों व गरीब कन्याओं के सामूहिक विवाह के समय दान के रूप में दिये जाएं। इस वर्ष कम से कम 108 कन्याओं का सामूहिक विवाह करवाने का भी निर्णय लिया गया। इस बात की जानकारी दी गई कि गत वर्ष 542 ऐसी वस्तुएं प्राप्त हुई थी जिनमें 280 वितरित की जाा चुकी हैं। बैठक में सामान्य हवन के लिए ली जाने वाली 1001 रूपए की राशि बढाकर 2100 रूपए निर्धारित की गई। मंदिर परिसर में किसी प्रकार के विवाह समारोह का आयोजन न करवाने का निर्णय लिया गया। कथापाठ या अन्य जागरण व धार्मिक कार्यक्रम पहले की तरह आयोजित करवाए जाएंगे। सुबह की आरती के समय मुख्य पुजारी आरती में उपस्थित रहेगा और सभी पुजारियों के लिए उनकी सुविधा के अनुसार एकसमान ड्रैस लागू होगी। आरती का सीधा प्रसारण वर्तमान जनता टीवी पर हो रहा है, इसका अन्य चैनलों पर भी प्रसारण किया जाएगा। काली माता मंदिर कालका की आरती का भी प्रसारण करवाया जाएगा। श्री माता मनसा देवी संस्कृत महाविद्यालय को कैथल जिले के मूंधड़ी में स्थापित किया जा रहा महर्षि  बाल्मिकी संस्कृत विश्वविद्यालय से संबध किया जाएगा। वर्तमान में चल रहे गुरुकुल की समबद्धता हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड या किसी अन्य बोर्ड से करवाने के लिए शीघ्र प्रक्रिया आगे बढाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि मंदिर परिसर में स्वच्छता विशेष रूप से नवरात्र मेले के दौरान बनाए रखने के प्रबंध किए जाएं। इस बात पर सहमति हुई कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव हर दो महीने में बोर्ड के गैरसरकारी सदस्यों की बैठक नियमित रूप से लेंगे और बोर्ड की आम बैठक में रखे जाने वाले एजंडे को सही ढंग से तैयार करेंगे। बोर्ड में ओल्ड 152 व्यक्तियों के ठहरने के लिए ओल्ड एज होम, लिफ्ट, परिक्रमा को चौड़ा करना, 100 किलोवाट के सौर ऊर्जा, सडक़ों की मरम्मत, काली माता मंदिर कालका में श्रद्धालुओं के लिए शैड को बढाना, कमल सरोवर का निर्माण, पार्क  की व्यवव्था करना, सिंह द्वार का निर्माण करवाने का भी निर्णय लिया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिरों में व्यवस्था बनवाना व दान देना एक नेक व श्रद्धा भावना से जुड़ा काम है। लोक स्वेच्छा से पूजा स्थलों पर आते हैं और प्रशासन को श्रद्धालुओं की हर सुविधा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के वादे के अनूरूप बोर्ड की बैठक साल में दो बार करवाने का निर्णय लिया गया है और आठ महीने बाद यह फिर आज की बैठक हुई है। इस पर बोर्ड के सदस्यों ने कहा था कि पहले यह बैठक पांच-पांच, छ:-छ: वर्षों के अंतराल में होती थी।