उपभोक्ताओं को मिले सस्ती बिजली दरें: मनीष गर्ग, रेगुलेटॅरी एक्सपर्ट व कंसल्टेंट

 

चंडीगढ, 08 अक्तुबर: नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन लागत में गिरावट के साथ यही समय है कि सस्ती बिजली दरों के जरिये फायदा पहुंचाते हुए उपभोक्ताओं को पुरस्कृत किया जाए। मनीष गर्ग, रेगुलेटॅरी एक्सपर्ट व कंसल्टेंट के अनुसार फ्लोर एवं फोरबियरेंस प्राइस के जरिये आरईसी की कीमत तय करने का लक्ष्य निवेशकों एवं उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों द्वारा गैर तर्कसंगत वसूली रोकने और ग्राहकों पर अनावश्यक वित्तीय दबाव पडऩे से रोकने के लिए इन्हें बाजार की नई परिस्थितियों के अनुकूल करने की जरूरत है।

भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में तेजी से विकास किया है। बेहतर नियामकीय एवं बाजार संबंधी व्यवस्था के दम पर हमारी नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता जून 2010 के 17.5 गीगावाट से बढक़र 10 साल में 65 गीगावाट पर पहुंच गई है।

गर्ग ने बताया कि कोयला एवं पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने की भारत की कोशिश ग्लोबल ट्रेंड के अनुरूप ही है, जहां सरकारें ऊर्जा आपूर्ति के लिए ज्यादा टिकाऊ विकल्प अपना रही हैं। यह ट्रेंड इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए)की रिपोर्ट से भी साफ दिखाई देता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के एनर्जी बास्केट में नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान इस समय 26 प्रतिशत है और 2024 तक इसके 30 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है।

पिछले एक दशक से ज्यादा समय से बिजली के लिए ज्यादा खुदरा कीमत चुकाते हुए ग्राहकों ने भी नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाई है। अब यह स्थिति बदलनी चाहिए क्योंकि भारत में नवीन, स्वच्छ एवं हरित नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की लागत ने 2018-19 में ग्रिड पैरिटी हासिल कर ली थी, जिससे पिछले एक दशक में नवीकरणीय ऊर्जा की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है।

मौजूदा समय में ऑब्लिगेटर (बाध्य) माने जाने वाले पारंपरिक सेग्मेंट, जैसे डिस्कॉम्स, कैप्टिव पावर प्लांट को या तो किसी तय हरित माध्यम से उत्पादित बिजली खरीदनी होती है या फिर उसके बदले में अपने रीन्यूएबल पावर परजेच ऑब्लिगेशन (आरपीओ) यानी नवीकरणीय ऊर्जा खरीद बाध्यता के तहत बाजार से श्रीन्यूएबल एनर्जी सर्टिफिकेट (आरईसी) खरीदना होता है।

नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में अवधारणा के स्तर पर आरपीओ सफल रहा है। लेकिन इसमें यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि ग्राहकों से नवीकरणीय ऊर्जा आधारित बिजली की तर्कसंगत कीमत वसूली जाए। जबकि ऐसा नहीं है। सौर आरईसी की कीमतें 2.25 रुपये प्रति यूनिट हैं, जबकि सौर ऊर्जा ;यानी बिजली़ आरईसी सर्टिफिकेट की बोली वित्त वर्ष 2017-18 से करीब 2.50 रुपये प्रति किलोवाट की औसत कीमत पर लग रही है।

इस समय बाजार की व्यवस्था के अनुरूप उपभोक्ताओं की चिंताओं को दूर करने का उचित समय है। नवीकरणीय ऊर्जा की कम कीमतों के मौजूदा माहौल में सरकार को आरईसी के लिए निगेटिव प्राइस पर विचार करना चाहिए और उन आम उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाना चाहिए जो पिछले एक दशक से ज्यादा कीमत चुकाकर नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रहे हैं।