एन.ज़ेड.सी.सी. द्वारा ‘संकल्प पर्व’ पर ऑनलाईन युवा कवि सम्मेलन का आयोजन

चण्डीगढ़, 05 जुलाई, 2020: संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पर्यावरण बचाव हेतु संचालित अभियान ‘संकल्प पर्व’ के उपलक्ष्य में उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, पटियाला के सौजन्य से विशेष ऑनलाईन युवा कवि सम्मेलन का आयोजन आज ‘गूगलमीट एप’ के माध्यम से सुप्रसिद्ध कलाकार व कवि सुशील ‘हसरत’ नरेलवी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। ई-मंच का संचालन नादौन, हिमाचल प्रदेश से कवि कार्तिक ने किया।

इस ऑनलाईन कवि सम्मेलन का शुभारम्भ चण्डीगढ़ के कवि सन्तोष कुमार की ग़ज़ल ‘जहाँ सवाल सवालों में उलझ जाते हैं’’ से हुआ, तत्पश्चात नादौन, हि.प्र. से कवि कार्तिक ने ग़ज़ल ‘‘यूँ तो मुखौटे बहुत हैं दिखाने के लिए’’; पर्यावरण के प्रति सजग करते हुए सुशील ‘हसरत’ नरेलवी ने नज़्म ‘क़ुदरत’ के माध्यम से सन्देशात्मक अपील करते हुए कहा, ‘‘धरती को फिर से ख़ुशनुमा जन्नत बना दे तू, ज़्यादा नहीं तो एक ही पौधा लगा दे तू’’, पालमपुर, हि.प्र. से हरिश चन्द्र ने ‘‘जिसने न मेह्नत की, न खेत सींचा, न बीज बोया, केवल फल खाया, उसे जीना नहीं आया; चण्डीगढ़ से शमशेर ‘साहिल’ ने ग़ज़ल ‘‘तेरी उम्मीद यूँ भी कर रहा हूँ’’; बिलासपुर, हि.प्र. से कवियित्री प्रतिभा शर्मा ने ‘‘परिन्दे हैं हम सब, हमें पेड़ दे दो’’; चण्डीगढ़ से युवा कवि नरेश ने कहावत-काव्य में कहा ‘‘उदधि रहे मर्यादा में, बहे उलटी नद नीर’’; चम्बा, हि.प्र. से युवा कवि तिलक राज ने मुकरी काव्य-विधा में ‘‘मन को बेहद प्यारा लागे, अतुलित जग से न्यारा लागे, इसी से मिली मुझे पहचान, क्यों सखि साजन? न सखि नाम’’ तो चण्डीगढ़ से युवा कवि अरविन्द द्विवेदी ने ‘‘चिर की मिली पराजय भूलें, नूतन का अभिसार करें हम”, सुनाकर दर्शकों को सार्थक सन्देश देते हुए उनका ख़ूब मनोरंजन किया।

अपने उद्गार व्यक्त करते हुए प्रोफेसर सौभाग्य वर्द्धन, निदेशक, उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, पटियाला ने कहा कि हमें नकारात्मकता में छुपी सकारात्मकता को ढूंढते रहना चाहिए तथा उन्होंने चन्द अश्आर भी सुनाकर ख़ूब वाह-वाही लूटी। अन्त में, अध्यक्षीय व्यक्तव्य में साहित्यकार डॉ. सुशील ‘हसरत’ नरेलवी ने कहा कि ‘‘आज विश्व को पर्यावरण के प्रति सजग व कर्मठ होने की आवश्यकता है तथा अधिक से अधिक पौधारोपन से ही यह सम्भव है।’’