ऑरल एंटी-प्लेटलेट थेरेपी पर कॉन्फ्रेंस आयोजित

चंडीगढ/ 12 जनवरी: पीजीआई सहित रीजन के 100 के लगभग फिजिशियन ने रविवार को हयात होटल में ओजस अस्पताल, पंचकूला के ज्योतिर्गमय एकेडमिक फाउंडेशन द्वारा आयोजित ऑरल एंटी-प्लेटलेट थेरेपी कॉन्फ्रेंस में भाग लिया।
कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हृदय रोगों में एस्पिरिन की भूमिका पर एक इंटरैक्टिव सेशॅन के साथ हुई । ज्योतिर्गमय एकेडमिक फाउंडेशन के चेयरपर्सन डॉ अनुराग शर्मा ने कहा कि हृदय रोग के लिए कोई जोखिम कारक नहीं रखने वाले रोगियों को एस्पिरिन नहीं दी जानी चाहिए। डॉ अनुराग जो ओजस अस्पताल में डायरेक्टर कार्डियोलॉजी भी हैं, ने कहा कि यह  केवल उन रोगियों में रेकॅमेन्ड  किया जाना चाहिए जिन्हें दिल का दौरा की हिस्ट्री है व बाईपास सर्जरी, एंजियोप्लास्टी व स्टेंटिंग के बाद।
पीजीआई से प्रो राजेश विजयवर्गीय, जीएमसीएच-32 से जीत राम , फोर्टिस से डॉ आरके जसवाल और पारस अस्पताल के डॉ एचके बाली ने एंटी-प्लेटलेट दवाओं की चुनौतियों और लाभों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि थेरेपी को ब्लीडिंग रिस्क, थ्रोम्बोसिस रिस्क, जोखिम कारकों की उपस्थिति, आयु, वजन और मधुमेह की स्थिति के आधार पर व्यक्तिगत किया जाना है।
डॉ पुनीत के वर्मा डायरेक्टर कार्डियोलॉजी ऐस हार्ट एंड वैस्कुलर इंस्टीट्यूट मोहाली के एक नए एंटी-प्लेटलेट ड्रग टिकाग्रेलर की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए जोर दिया कि रोगियों के लिए दवाओं का चयन करने से पहले थ्रोम्बोटिक रिस्क और ब्लीडिंग रिस्क को ठीक से माप, निगरानी और संतुलित किया जाना चाहिए।
डॉ सुधीर सक्सेना डायरेक्टर कार्डियोलॉजी मैक्स अस्पताल मोहाली ने उन रोगियों जिनके एंजियोप्लास्टी हुए हैं और जिन रोगियों में थ्रोम्बोकोटिक रिस्क और हाइ ब्लीडिंग रिस्क है, में पोटॅन्ट एंटी-प्लेटलेट ड्रग प्रासुग्रेल की भूमिका की व्याख्या की ।
डॉ अरुण चोपड़ा डायरेक्टर कार्डियोलॉजी फोर्टिस एस्कॉट्र्स अस्पताल ने पुराना वॉरहोर्स क्लोपिडोग्रेल की भूमिका के बारे में बात की जो अभी भी कोरोनरी धमनी रोगों , स्थिर एनजाइना और एंजियोप्लास्टी के एक साल बाद और बाईपास सर्जरी के लिए पसंद का ड्रग है। यह अभी भी सबसे सस्ता और आसानी से उपलब्ध है, उन्होंने कहा। कॉन्फ्रेंस के अंत में पुरस्कार वितरण से पहले एक प्लेटलेट्स क्विज भी आयोजित किया गया ।