कांग्रेस में मची है खलबली, हो रहा सिर फुटव्वल: विजयपाल सिंह

 

चंडीगढ़, सफीदों: भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट विजयपाल सिंह ने कहा कि कांग्रेस में भारी खलबली मची हुई है और कांग्रेसी आपस में ही सिर फुटव्वल हो रहे हैं। कांग्रेस के एक विधायक ने हाल ही में ब्यान दिया है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी शैलजा पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर की तरह नहीं है कि वे उनकी तरह कांग्रेस छोड़ जाएंगी। इस ब्यान का सीधा-सीधा अर्थ है कि प्रदेश कांग्रेस पर कोई एक परिवार अपना कब्जा स्थापित करना चाहता है।

संयुक्त किसान मोर्चा नेता तलाश रहे हैं राजनीतिक जमीन l

विजयपाल सिंह ने कहा कि प्रदेश तो क्या कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर भी एक ही परिवार का कब्जा है। इसी तर्ज पर हरियाणा कांग्रेस में भी परिवारवाद बनाम खेमेबाजी को लेकर जबरदस्त कलह का माहौल है। कांग्रेस में हमेशा से ही पार्टी पर कब्जा करने की जंग की प्रथा चली आ रही है क्योंकि इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री देवीलाल, पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल, पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल जैसे दिग्गज नेताओं ने भी कांग्रेस से अलग होकर अपनी-अपनी क्षेत्रीय पार्टियों का गठन किया था।

विजयपाल सिंह ने कहा कि आज हरियाणा कांग्रेस में कई कांग्रेस बन गई हैं। जिनमें भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस, सुरजेवाला कांग्रेस, शैलजा कांग्रेस, कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस व किरण चौधरी कांग्रेस शामिल हैं। भाजपा प्रवक्ता ने संयुक्त किसान मोर्चा नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी के चुनाव लडऩे के बयान पर चुटकी लेते हुए कहा कि अब इन तथाकथित किसान नेताओं की असलियत सामने आने लगी है। इन नेताओं को भोले-भाले किसानों से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें तो सिर्फ अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने से मतलब है। इससे सिद्ध होता है कि इनका मकसद सिर्फ राजनीति करना है नाकि किसानों की भलाई से कोई नाता है। उन्होंने 200-200 किसानों के संसद कूच पर कहा कि इन किसान नेताओं का मकसद सिर्फ देश में अव्यवस्था और डर का माहौल पैदा करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेकना है।

उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानून किसानों के हित के हैं। जो किसान नेता कहते थे कि इन कानूनों से एमएसपी समाप्त होगी, मंडिया बंद हो जाएंगी, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा सरकार मंडियों को और ज्यादा सुदृढ़ बनाने में लगी है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद प्रणाली जारी है और जारी रहेगी। कृषि कानूनों में मंडियों को समाप्त करने का कोई प्रावधान नहीं है। मंडिया राज्यों के कानूनों के तहत स्थापित है।