केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा कोई आर्थिक पैकेज नहीं दिए जाने से खुदरा व्यापार संकट में: राष्ट्रीय जन-उद्योग व्यापार संगठन, अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला

चंडीगढ़, 21 जुलाई। खुदरा व्यापार बेहद संकट की स्थिति में हैं और इस समय में केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा कोई आर्थिक पैकेज नहीं दिए जाने से खुदरा व्यापार अपने अब तक के सबसे बुरे समय से गुजर रहा है। ये बात आज राष्ट्रीय जन-उद्योग व्यापार संगठन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने बर्बादी की कगार पर पहुंचे खुदरा व्यापार पर सरकार की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कही। बुवानीवाला ने कॉन्फेड्रेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि कोरोना के कारण पिछले 100 दिनों में रिटेल व्यापार को 15.5 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है और अगर केन्द्र व प्रदेश सरकार ने तुरंत इस स्थिति को ठीक करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाये गए तो देश भर में लगभग 20 फीसदी दुकानों को बंद करने की नौबत आ जाएगी। बुवानीवाला ने कहा कि भारतीय खुदरा व्यापार को लगभग 15.5 लाख करोड़ रुपये के घाटे का सामना करना पड़ा है। इसकी वजह से भारी उथल-पुथल के साथ घरेलू व्यापार में लॉकडाउन खुलने के 45 दिनों के बाद भी व्यापारी उच्चतम वित्तीय संकट, कर्मचारियों और दुकानों पर ग्राहकों की भारी कमी से बेहद परेशान हैं। देश के घरेलू व्यापार की वर्तमान स्थिति व्यापारी नेता अशोक बुवानीवाला ने कहा कि घरेलू व्यापार अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। खुदरा व्यापार पर चारों तरफ से बुरी मार पड़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की उदासीनता के चलते ऐेसे हालात में अगर 20फीसदी दुकानें बंद होती हैं तो बेरोजगारी और भी अधिक बढ़ सकती है। बुवानीवाला ने बताया कि अनुमान के मुताबिक देश के घरेलू व्यापार को अप्रैल में लगभग 5 लाख करोड़, मई में लगभग 4.5 लाख करोड़, जून महीने में लॉकडाउन हटने के बाद लगभग 4 लाख करोड़ था और जुलाई के 15 दिनों में लगभग 2.5 लाख करोड़ के व्यापार का घाटा हुआ है। उन्होंने कहा कि कोरोना के डर की वजह से स्थानीय खरीददार बाजारों में नहीं आ रहे हैं। अंतर-राज्यीय परिवहन की उपलब्धता में अनेक परेशानियों के कारण खरीददारी बिल्कुल ठप है जिससे देश के खुदरा व्यापार को काफी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि सभी कारणों के चलते देशभर के व्यापारिक बाजारों में बेहद सन्नाटा है और आमतौर पर व्यापारियों को प्रतिदिन शाम 5 बजे के आसपास ही अपना कारोबार बंद करना पड़ रहा है। बुवानीवाला ने कहा कि देश भर के व्यापारियों से उपलब्ध जानकारी के अनुसार कोरोना अनलॉक अवधि के बाद अब तक केवल 10 फीसदी उपभोक्ता ही बाज़ारों में आ रहे हैं जिसके कारण व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि अभी तक व्यापारियों को केंद्र सरकार या राज्य सरकारों द्वारा कोई आर्थिक पैकेज पैकेज नहीं दिया गया जिसके कारण व्यापार को पुन: जीवंत करना बेहद मुश्किल काम साबित हो रहा है। उन्होंने कहा ऐसे समय में जबकि देश भर के व्यापारियों की देख-रेख बेहद जरूरी थी, तो उन्हें अकेला छोड़ दिया गया है। इस समय केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा व्यापारियों को ऋण आसानी से मिले इसके लिए एक मजबूत वित्तीय तंत्र को तैयार करना बेहद जरूरी है और साथ ही 25 हजार से कम आमदनी वाले दुकानदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए पेंशन योजना व उनके खातों से सीधा नकदी पहुंचाने जैसी स्कीम को लागू करें। बुवानीवाला ने मांग करते हुए कहा कि व्यापारियों को करों के भुगतान में छूट और बैंक ऋण, ईएमआई आदि के भुगतान के लिए एक विशेष अवधि दी जाए और उस अवधि पर कोई ब्याज अथवा पेनल्टी व्यापारियों से न ली जाए ताकि बाजार में आर्थिक तरलता आ सके।