कोरोना टेस्ट के नाम पर 1600 रूपए लेने का फैसला बिल्कुल गलत

चण्डीगढ़: हरियाणा प्रदेश व्यापार मण्डल के प्रदेश प्रवक्ता एवं प्रुमख समाजसेवी डा. राजकुमार गोयल ने प्रदेश के मुख्यमन्त्री मनोहर लाल और स्वास्थ्य मन्त्री अनिल विज को ट्वीट कर कहा है कि सरकार का कोरोना टेस्ट के नाम पर 1600 रूपए लेने का फैसला बिल्कुल गलत है। गोयल का कहना है कि सरकार ने यह क्या किया। अब गरीब लोग क्या करेंगे। राजकुमार गोयल ने सरकार से इस फैंसले को तुरन्त वापिस लेने की मांग की है।

व्यापार मण्डल के प्रदेश प्रवक्ता राजकुमार गोयल ने मुख्यमन्त्री और स्वास्थ्य मन्त्री को किया ट्वीट |

गोयल का कहना है कि सरकार की नई डायरेक्शन के अनुसार जो भी व्यक्ति अस्पताल में कोरोना टेस्ट कराने आएगा और उसमें कोई कोरोना सम्बन्धित सिमटमस नजर नहीं आ रहे और वह किसी कोरोना मरीज के सम्पर्क में नहीं आया है तो उसे कोरोना के आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए 1600 रूपए देने पड़ेंगे। बिना 1600 रूपए दिए उसका टेस्ट नहीं होगा। गोयल का कहना है कि सरकार द्वारा यह फीस बहुत ज्यादा कर दी गई है जो गरीब आदमी के बस की बात नहीं।

इस फैसलें को तुरन्त वापिस लेने की कि मांग |

गोयल का यह भी कहना है कि स्कूलों से सम्बन्धित जो भी स्टाफ कोरोना टेस्ट कराने आता है उसके लिए भी सरकार ने आरटीपीसीआर टेस्ट करवाना अनिवार्य कर दिया है जो कि 1600 रूपए का होता है। स्कूल लम्बे समय से बन्द पड़ें है ऐसे में प्रति टीचर 1600 रूपए लेना बिल्कुल गलत है। इसके अलावा कोई भी व्यक्ति मैडिकल फिटनेस के लिए कोरोना टेस्ट करवाता है तो उसका टेस्ट भी 1600 रूपए कर दिया गया है। यदि किसी को कम्पनी में ज्वाईनिंग करनी है और उसके लिए उसे कोरोना टेस्ट का सर्टिफिकेट चाहिए तो उसका टेस्ट भी 1600 रूपए का होगा। गोयल का कहना है कि कोरोना बिमारी को सरकार ने महामारी घोषित किया हुआ है। इस महामारी में यूं 1600 रूपए टेस्ट के नाम पर लेना बिल्कुल गलत है। सरकार को यह निर्णय तुरन्त वापिस लेना चाहिए।