क्या नीच मंगल देश में किसी आने वाले अमंगल का सूचक है ?

चंडीगढ़- ज्योतिष पर अक्सर यह तंज कसा जाता है कि इंसान चांद पर पहुंच गया हैे, मंगल यान , मंगल पर लैंड कर चुका है और कुछ दकियानूसी लोग अभी ग्रहों के चक्कर में जनता को घन चक्कर बना रहे हैं। एक बाबा तो कहते हैं कि शनि करोड़ों मील दूर बैठ कर मेरा क्या कर लेगा ? पत्थर पर तेल- पानी चढ़ाने से किस्मत बदल जाएगी क्या ? 

परंतु पूर्णमासी या सुपर मून होने  पर ही ज्वार भाटा या सुनामी क्यों आता है ?  आकाश में मंगल व शनि की युति या 180 डिग्री के कोण पर आमने सामने होने पर ही भूकंप क्यों आते हैं ? मंगल यदि सूर्य के अंशों से आगे हो ता वर्षा न्यूनतम ही क्यों होती है ? मंगल के अतिचारी या नीच होने पर विश्व में कई बड़े युद्ध क्यों हुए ? ऐसे सवालों के जवाब विज्ञान के पास कम, भारत के वैदिक ज्योतिष में अधिक तार्किक एवं वैज्ञानिक हैं क्योंकि ज्योतिष खगोलीय ग्रहों एवं नक्षत्रों का धरती ओैर पृथ्वी पर रह रहे मनुष्यों , वनस्पति अन्य जीवों पर पड़ रहे प्रभावों का अधिक सटीक विश्लेषण करता है।

मेदनीय ज्योतिष अर्थात लोक भविष्य के अनुसार इस अवधि में जब मंगल- राहु , शनि व केतु के ठीक आमने  सामने 180 डिग्री के कोण पर जुलाई मास के दौरान रहेंगे तो देश में अराजकता, वैमनस्य, दंगे, सीमा पर जन हानि, मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण फेरबदल, अनुशासनहीनता ,धरती पर मौसम परिवर्तन के कारण हानि, भूकंप के झटके, वर्षा से नुक्सान, किसी लोकप्रिय नेता तथा अभिनेता का विछोह संभावित है।

आइए पहले खगोल शास्त्र के अनुसार मंगल के बारे जान लें।

मंगल को हम लाल ग्रह के रूप में भी जानते हैं।

1- सौर मंडल में मंगल सूरज से 14.2 करोड़ मील की दूरी पर है. धरती तीसरे नंबर पर है जिसके बाद चौथे नंबर पर मंगल है. धरती सूरज से 9.3करोड़ मील की दूरी पर है.

2- धरती की तुलना में मंगल ग्रह लगभग इसका आधा है. जहां धरती का व्यास 7,926 मील है,मंगल का व्यास 4,220 मील है. वजन  – मंगल धरती के दसवें हिस्से के बराबर है.

3- मंगल सूरज का पूरा चक्कर 687 दिनों में लगाता है. इस आधार पर धरती की तुलना में मंगल सूरज का चक्कर लगाने में दोगुना वक़्त लेता है और यहां एक साल 687 दिनों का होता है.

4- मंगल पर एक दिन (जिसे सोलर डे कहा जाता है) 24 घंटे 37 मिनट का होता है.

5- कँपकँपा देने वाली ठंड, धूल भरी आँधी का ग़ुबार और फिर बवंडर-पृथ्वी के मुक़ाबले ये सब मंगल पर कहीं ज़्यादा है. माना जाता है कि जीवन के लिए मंगल की भौगोलिक स्थिति काफ़ी अच्छी है.

गर्मियों में यहाँ सबसे ज़्यादा तापमान होता है 30डिग्री सेल्सियस और जाड़े में यह शून्य से घटकर140 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है.

6- धरती की तरह मंगल में भी साल में चार मौसम आते हैं- पतझड़, ग्रीष्म, शरद और शीत. धरती की तुलना में मंगल में हर मौसम लगभग दोगुना वक्त तक रहता है.

7- धरती और मंगल पर गुरुत्वाकर्षण शक्ति अलग होने के कारण धरती पर 100 पाउंड वज़न वाला व्यक्ति मंगल पर 38 पाउंड वज़न का होगा.

8- मंगल के पास दो चांद हैं- फ़ोबोस जिसका व्यास 13.8 मील है और डेमियोस जिसका व्यास7.8 मील है.

9- मंगल और धरती दोनों ही चार परतों से बने हैं. पहली पर्पटी यानी क्रस्ट जो लौह वाले बसाल्टिक पत्थरों से बना है. दूसरा मैंटल जो सिलिकेट पत्थरों से बना है.

10- मंगल के वातारण में 96 फ़ीसदी कार्बन डाई ऑक्साइड है, 1.93 फ़ीसदी आर्गन, 0.14 फ़ीसदी ऑक्सीजन और 2 फ़ीसदी नाइट्रोजन है.

साथ ही यहां के वातावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड के निशान भी पाए गए हैं.

      सौरमंडल के ग्रहों में वैज्ञानिकों के नज़रिये से तो मंगल महत्वपूर्ण है ही लेकिन ज्योतिषशास्त्र में भी मंगल का काफी महत्व माना जाता है। अंग्रेजी में मंगल को मार्स जो कि युनानियों के कृषिदेवता कहे जाते हैं। इन्हीं के नाम पर ग्रेगोरियन कैलेंडर के तीसरे महीने का नाम मार्च रखा गया है। रोमन इन्हें युद्ध का देवता भी कहते है। लेकिन हिंदू पौराणिक ग्रंथों में मंगल को भौमेय यानि पृथ्वी का पुत्र कहा जाता है। कुछ पुराण इन्हें भगवान शिव के पसीने से उत्पन्न मानते हैं।

       ज्योतिष शास्त्र में मंगल मेष एवं वृश्चिक राशि के स्वामी माने जाते है। मंगल ऊर्जा के प्रतीक हैं। मंगल जातक को जूझारू बनाते हैं। ये सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति के मित्र हैं तो बुध व केतु के साथ इनका शत्रुवत संबंध है। शुक्र और शनि के साथ इनका संबंध तटस्थ है। मंगल मकर राशि में उच्च के रहते हैं तो कर्क राशि में इन्हें नीच का माना जाता है। मंगल दोष से पीड़ित जातक को अपने वैवाहिक जीवन में कष्टों से लेकर दरिद्रता जैसे दु:ख उठाने पड़ते हैं। मंगल का राशि परिवर्तन करना जातक की कुंडली में भावानुसार सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव डालता है।

        भारतीय ज्योतिष में मंगल इसी नाम के ग्रह के लिये प्रयोग किया जाता है। इस ग्रह को अंगारक (यानि अंगारे जैसा रक्त वर्ण), भौम (यानि भूमि पुत्र) भी कहा जाता है। मंगल युद्ध का देवता कहलाता है और कुंवारा है। यह ग्रह मेष एवं वृश्चिक राशियों का स्वामी कहलाता है। मंगल रुचक महापुरुष योग या मनोगत विज्ञान का प्रदाता माना जाता है। इसे रक्त या लाल वर्ण में दिखाया जाता है एवं यह त्रिशूल, गदा, पद्म और भाला या शूल धारण किये दर्शाया जाता है। इसका वाहन भेड़ होता है एवं सप्तवारों में यह मंगलवार का शासक कहलाता है।

भारतीय ज्योतिष में मंगल ग्रह को प्रथम शेणी का हानिकारक माना जाता है। यह मेष राशि एवं वृश्चिक राशि का स्वामी होता है। इसके अलावा मंगल मकर राशि में उच्च भाव में तथा कर्क राशि में नीच भाव में कहलाता है। सूर्य, चंद्र एवं बृहस्पति इसके सखा या शुभकारक ग्रह कहलाते हैं एवं बुध इसका विरोधी ग्रह कहलाता है। शुक्र एवं शनि अप्रभावित या सामान्य रहते हैं।

मंगल तीन चंद्र नक्षत्रों का भी स्वामी है: मृगशिरा,चित्रा एवं श्राविष्ठा या धनिष्ठा। मंगल से संबंधित वस्तुएं हैं: राक्त वर्ण, पीतल धातु, मूंगा, आदि। इसका तत्त्व अग्नि होता है एवं यह दक्षिण दिशा और ग्रीष्म काल से संबंधित है।

      मंगल ग्रह शारीरिक ऊर्जा, आत्मविश्वास और अहंकार, ताकत, क्रोध, आवेग, वीरता और साहसिक प्रकृति का प्रतिनिधित्व करता है। यह रक्त, मांसपेशियों और अस्थि मज्जा पर शासन करता है। मंगल लड़ाई, युद्ध और सैनिकों के साथ भी जुड़ा हुआ है। मंगल  ऊर्जा, शक्ति एवं पराक्रम का कारक है। जातक की कुंडली में मंगल साहस और संकल्प शक्ति को दर्शाता है। यह मेष एवं वृश्चिक राशि का स्वामी है और कर्क व सिंह राशि के लिए योगकारक ग्रह है। यदि मंगल कुंडली में तीसरे, छठे, दसवें एवं ग्यारहवें भाव में स्थित हो तो इसके परिणाम अच्छे और लाभकारी होते हैं। इसके अलावा मंगल ग्रह रक्त से संबंधित बीमारियों का भी प्रतिनिधित्व करता है।

किसी जातक की कुंडली में यदि मंगल अनुकूल अवस्था में हो तो जातक के स्वभाव में निडरता देखी जा सकती है। ऐसा जातक किसी के दबाव में आकर कोई काम नहीं करता। इसके साथ ही ऐसे लोग आमतौर पर अभिमानी भी हो सकते हैं। जिनकी कुंडली में मंगल अनुकूल अवस्था में होता है, शारीरिक रुप से ऐसे ही लोग बलवान और रुपवान होते हैं। वहीं अगर कुंडली में मंगल की स्थिति अनुकूल न हो तो, जातक को रक्त संबंधी किसी प्रकार की समस्याएं आ सकती हैं। आपके शत्रु आप पर हावी हो सकते हैं और पारिवारिक जीवन में भी आपको समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप मंगल ग्रह के अच्छे फल पाना चाहते हैं तो आपको इससे जुड़े उपाय करने चाहिए।

राशियों पर यह रहेगा प्रभाव

 कर्क राशि में गोचर 

मंगल ग्रह 22 जून को रात्रि 11 बजकर 21 मिनट पर मिथुन से कर्क राशि नीच में गोचर करेंगे। यह 9अगस्त सुबह 4 बजकर 32 मिनट तक कर्क राशि में रहेंगे। कर्क राशि में मंगल और बुध साथ-साथ गोचर करेंगे। मंगल अपनी नीच राशि में 18 माह बाद आता है। इस बार यह नीच राशि में 47 दिन 5घंटे 11 मिनट तक रहेंगे। इस कारण आंधी, तूफान के साथ साथ जातकों में क्रोध और अहंकार देखने को मिलेगा। वहीं विशेषतः मंगल शनि द्वारा चार राशियों में नीच भंग राजयोग भी बनेगा जिससे मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि को विशेष लाभ होता दिख रहा है।

मेष- माता-पिता का इस दौरान आपको विशेष ख्याल रखना होगा । जीवनसाथी नाराज़ हो सकता है। ऊर्जा और आमदनी में वृद्धि होने की संभवना भी है।

वृषभ- संकल्प शक्ति में इज़ाफा होगा। छोटे भाई-बहनों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं,विरोधियों पर हावी रहेंगे। बेवजह के विवादों में इस समय नहीं पड़ना चाहिए। छोटी दूरी की यात्रा पर भी जा सकते हैं।

मिथुन- आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। गलत व्यवहार आपको मानसिक तनाव दे सकता है। गलत संगति से बचकर रहें पढ़ाई पर ध्यान दें।

कर्क- मंगल ग्रह आपकी ही राशि अर्थात आपके प्रथम भाव या लग्न भाव में गोचर करेगा। कार्यक्षेत्र में आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। सेहत में गिरावट आ सकती है।

सिंह – विदेश जा सकते हैं। खर्चों में वृद्घि। जो विदेशों में रह रहे हैं उन्हें थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में इस दौरान आपको सफलता मिलेगी। मानसिक परेशानी ।

कन्या- लाभ मिलेगा। वैवाहिक जीवन में थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सामजिक जीवन में आपको अच्छे फल मिलेंगे। विरोधी आपके सामने टिक नहीं पाएंगे

तुला- वाद विवादों को टाले। वाद-विवाद की स्थिति बन सकती है। वाणी पर संयम रखने की कोशिश करें। नौकरी पेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में अच्छे परिणाम मिलेंगे। प्रेम में अड़चनें आ सकती हैं।

वृश्चिक- भाई बहन पिता से आपके संबंध बिगड़ सकते हैं और उनकी सेहत में गिरावट भी देखी जा सकती है। लंबी दूरी की यात्रा । छात्रों को पढ़ाई के प्रति सकारात्मक रुख अपनाने की जरूरत है।

धनु- चुनौतियों से सफलता मिलेगी। वैवाहिक जीवन में तकरार की स्थिति बन सकती है। वाहन नियमों का उल्लंघन न करें। मदिरा और माँस का सेवन न करें ।

मकर- क्रोध पर भी नियंत्रण रखने की जरूरत है। जीवनसाथी के साथ तकरार न करें। यह समय कार्यक्षेत्र में भी बहुत अच्छा नहीं रहेगा आपको कड़ी मेहनत के बाद ही अच्छे परिणाम मिलेंगे।

कुंभ- षष्टम भाव में मंगल ग्रह का गोचर होगा। अपना ही नुकसान कर सकते हैं। वैवाहिक जीवन में थोड़ी बहुत परेशानियों का सामना आपको करना पड़ सकता है।

मीन- आमदनी में वृद्घि होगी। बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं उनका ख्याल रखें। दांपत्य जीवन में ख़ुशियाँ आएंगी, आपके जीवनसाथी को इस दौरान अप्रत्याशित लाभ मिल सकता है।