गांधी स्मारक चंडीगढ़ सैक्टर 16: शारदा के घोटालो का हुआ पर्दा-फास

 

चंडीगढ़:- गांधी स्मारक निधि सैक्टर १६ के डायरेक्टर देवराज त्यागी ने श्री नरेन्द्र सिंह सैक्टर ३८ चंडीगढ़ की शिकायत को निराधार बताया है। नवम्बर २०१६ में श्री के. के. शारदा ने गांधी स्मारक निधि जो पिछले ६० वर्षो से गांधी जी के रचनात्मक कार्यों में लगी है उसको नये सिरे से सब रजिस्ट्रार चंडीगढ़ में दस हजार रूपये की पूंजी से रजिस्ट्रर करा कर कब्ज़ा कर लिये। जब मातृ संस्था राजघाट नई दिल्ली की ओर से मुक़दमा दायर किया गया तो संस्था छोडने के बाद संस्था को बदनाम कर रहें है जबकि यहाँ पर बहुत अच्छा कार्य चल रहा है। नवम्बर २०१६ से १६ जुलाई २०२० तक श्री के. के. शारदा निधि के अध्यक्ष रहे जो भी कार्य हुए है। वह उनकी जानकारी में है तथा उन्हीं के आदेश से किसी भी संस्था एवं फर्म को जगह दी गई और उनसे जगह की एवज में दान लिया जाता था।  क्वालिटी सॉफ्ट कंपनी यहाँ पिछले कुछ समय से यहाँ ऑफिस चलाती थी। मार्च २०२० से उन्होंने यहां से काम बंद कर दिया है। उनके साथ-साथ कई अन्य लोग भी यहां से जगह खाली कर गए हैं।

यहां से पद छोड़ने के बाद शारदा जी कुंठाग्रस्त है तथा अनेक आरोप संस्था पर स्वंय व अपने मित्रों से लगवा रहें हैं। हांलाकि उन्होंने अपने कार्यकाल में संस्था के लाखों रुपये खर्च करके अपना यहाँ कार्यालय बनवाया जबकि अध्यक्ष का कार्यालय पानीपत अथवा दिल्ली में होता है। अपने लिये गाड़ी खरीदी तथा गाड़ी का प्रयोग संस्था के साथ-साथ अपने निजी कार्यों के लिए भी किया। एक ड्राइवर रखा जिसका खर्च संस्था उठा रही है इसके अलावा उनके निजी अतिथियों का नाश्ते-पानी का खर्च भी संस्था उठाती रही है।

संस्था के नियमों के विरुद्ध इन्होंने अपने खास चहेते को एक कैंटीन बनवा कर दी। और कैन्टीन वाले ने यहाँ पर फ्रूट शॉप व ढ़ाबा खोल दिया जबकि सैक्टर १६ की मार्किट एवं कुछ लोगों ने इसकी शिकायत भी की लेकिन पूर्व अध्यक्ष ने ढ़ाबा को बन्द करने की इजाजत नहीं दी।

इनके ऐसे अनेक कामों से मातृ संस्था राजघाट दिल्ली के अधिकरी नाराज़ थें तथा इन्होंने मज़बूरी में आकर अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दिया।

श्री शारदा जी अपनी पत्नी सेवानिवृत्त श्रीमती प्रज्ञा शारदा के लिए एक ऑफिस बनवाया तथा उनको यहाँ पर एडजेस्ट करना चाह रहे थें। जिसमे वे सफल नहीं हो पाये। इसलिए भी शारदा जी संस्था को बदनाम कर रहे है।