चण्डीगढ़ में पूर्वांचल के भीष्म पितामह शारदा प्रसाद का निधन; पूर्वांचल निवासियों में गहरा शोक : तिवारी ने दुःख जताया

चण्डीगढ़: पूर्वांचल के भीष्म पितामह शारदा प्रसाद का आज यहां निधन हो गया। वे 70  वर्ष के थे। चण्डीगढ़ के निर्माण में पूर्वांचलियों का अहम् रोल रहा है। 70 के दशक में जब चण्डीगढ़ विकास की राह पर था तो उस समय सबसे पहले पूर्वांचल से यहां आने वालों में शारदा प्रसाद का नाम जुबान पर आता है। इसीलिए उन्हें पूर्वांचल के भीष्म पितामह के नाम से भी जाना जाता था। वे कैंसर रोग से ग्रस्त थे। उनके निधन का समाचार मिलते ही लोग शोकाकुल हो उठे व गाँव दडुआ स्थित उनके घर पर जुटने लग गए। आज शाम उनका अंतिम संस्कार से.-25 स्थित शमशान घाट में किया गया जिसमें बड़ी संख्या में पूर्वांचल से जुड़े स्थानीय बड़े नेताओं के आलावा आम जन भी शामिल थे।   
शारदा प्रसाद कई बार जिला परिषद् व पंचायत के सदस्य भी रहे। कांग्रेस के स्थानीय महासचिव शशिशंकर तिवारी ने शारदा प्रसाद के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन दबे कुचले गरीब बेसहारा लोगों के उद्धार हेतु समर्पित किया हुआ था व उनके उठान के लिए अगणित काम किये। दडुआ के पूर्व सरपंच गुरप्रीत सिंह हैप्पी ने भी दुःख प्रकट करते हुए कहा कि शारदा प्रसाद हरेक की दुःख व् परेशानी में साथ खड़े होते थे। पूर्व पंच सत्येंद्र राय, शिव यादव, विनय सिंह, स. बलिहार सिंह, अजय पाण्डे, नन्द कुमार यादव आदि ने भी शोक जताया।