चिक बनाने वाले कारीगर भी हुए नगर निगम के खिलाफ लामबंद

चंडीगढ़: पिछले लगभग 50 साल से चिक बनाने और कूलर पैड का काम करने वाले कारीगर भी नगर निगम की स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट की जद में आ गए है। नगर निगम ने उनका कारोबार भी ठप कर दिया है। काम न होंने की वजह से वो लोग बेरोजगार तो हो ही गए है बल्कि परिवार का भरण पोषण भी मुश्किल हो गया है। नगर निगम के खिलाफ ये सभी कारीगर लामबंद हो गए है।अपनी व्यथा जाहिर करने के लिए चिक और कूलर पैड मेकर्स ने पत्रकार वार्ता की तथा स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के तहत हुयी कार्रवाई को अपने साथ हुए अत्याचार का जिक्र किया ।  इस अवसर पर एसोसिएशन के सदस्य शीतल, राजेश कुमार चेयरमैन, एवं दविंदर कुमार, संजीवन कुमार, गौरव, रमन कुमार, हिम्मत कुमार, सुशील कुमार, राजिंदर कुमार, संजू, कश्मीरी लाल, अनिल कुमार, विजय कुमार, विनय, गगन, अमित कुमार और शिवा इत्यादि भी मौजूद थे।
उजाड़े जाने से चिक कारीगर परिवार का भरण पोषण हो गया है मुश्किल
 
पत्रकारों से बातचीत करते हुए दी चिक मेकर्स एंड कूलर पैड मेकर्स एसोसिएशन के प्रेजिडेंट लोकेश कुमार ने बताया कि सेक्टर 22 में डिस्पेंसरी के पास चिक और कूलर पैड बनाने वाले कारीगर पिछले 50 साल से काम कर रहे है। इस कला  में अब तीसरी पीढ़ी कार्यरत है। इस वक्त लगभग 21 कारीगर काम कर रहे है, जोकि आपस मे रिश्तेदार है। इसमें से लगभग सभी लाइसेंस धारक  है। ट्राईसिटी के आम आदमी से लेकर चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम कार्यालयों से उनको चिक बनाने और कूलर पैड बनाने का काम मिलता रहा है। उन सभी की इस काम मे महारत और चिक में वैराइटी के चलते उन सभी का पारिवारिक भरण पोषण अच्छा चल रहा था। लेकिन 06 दिसंबर अल सुबह, जब वो सब अपने अपने घर पर सो रहे थे, नगर निगम ने उन सभी का सामान ज़ब्त कर उन सभी को सड़कों पर ला दिया। जब इस बारे में नगर निगम अधिकारियों से बात की गई तो न तो उन्हें सामान ही वापिस मिला और न ही उन्हें कहीं और बैठने की इजाजत दी गई। उन्होंने बताया कि अपनी समस्या को लेकर उनका एक प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ के  डी सी मनदीप सिंह बराड़ से भी मुलाकात कर चुका है। उनकी समस्या सुनने के बाद उन्होंने आश्वासन दिया है कि वो जल्द ही इस बाबत कुछ करेंगे और उनका प्रयास रहेगा कि उन्हें उनके कार्यानुरूप स्थान मुहैया करवाया जा सके। उन्होंने बताया की स्थानीय पार्षद रविकांत शर्मा से भी उन्हें पूरा सहयोग मिल रहा है। वो भी उन्हें फिर से बसाए जाने के लिए पुरजोर प्रयास कर रहे है।
शहर से चिक कारीगरी का मिट जाएगा अस्तित्व
 
उन्होंने बताया कि उनकी एसोसिएशन जो की रजिस्ट्रार ऑफ़ कमेटीज से रजिस्टर्ड है, एसोसिएशन के अंतर्गत आने वाले लगभग सभी सदस्यों का नगर निगम के पास स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के तहत पंजीकरण हो रखा है। जानकारी के अनुसार उन्हें वेंडर्स जोन के तहत अलग अलग बिठाया जा रहा है। जोकि उन्हें मुनासिब नहीं लग रहा, इसके अलावा उन्हें 4×7 का स्पेस दिया जा रहा है, जोकि उनके काम के अनुरूप उचित नहीं है। उनके द्वारा तैयार की जाने वाली चिक इससे बड़े साइज की होती है । कई बार कस्टमर को दिखने के लिए खुली जगह चाहिए होती है, इसलिए इतने छोटे स्पेस में वो कैसे चिक तैयार करेंगे, कैसे डिस्प्ले करेंगे । उनकी नगर निगम आयुक्त से विनम्र विनती है की उनके कार्य को देखते हुए उसके अनुरूप उचित स्पेस मुहैया करवाया जाये।
एसोसिएशन के एक अन्य सदस्य  ने बताया कि उनकी नगर निगम से गुजारिश है कि उनकी पारिवारिक स्थिति को जेहन में रखते हुए उन सभी को एक ही जगह पर एडजस्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन और नगर निगम ने शहर में जिस तरह से बुक मार्किट, फिश मार्किट, फर्नीचर मार्किट इत्यादि मार्किट बना, इन सबको एडजस्ट किया है तो क्यों नही उनकी कारीगरी की कद्र करते हुए उन्हें भी एक अलग जगह क्यों नही एडजस्ट किया जाता। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें जगह न दी गयी तो शहर से न केवल चिक बनाने की कला खत्म हो जाएगी, बल्कि उनके परिवारों के भूखे मरने की नौबत आ जायेगी। इसके अलावा उन्हें जगह भी उनके काम के हिसाब से दी जाए। छोटी सी जगह से उनका गुजर नही होगा।