जीवन बचाने के लिए कश्मीर व हरियाणा के परिवारों ने किया स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट

चण्डीगढ़, 4 मार्च: कश्मीर और हरियाणा के दो परिवारों ने अपने प्रियजनों के जीवन को बचाने के लिए किडनी की अदला-बदली करके भाईचारे, प्रेम, स्नेह और बलिदान एक उदाहरण पेश किया ।
कुलग्राम गांव, अनंतनाग  की रहने वाली इफरा जान (20) ने यमुनानगर के अजय कुमार को अपनी किडनी दान करने के लिए आगे आकर इस छोटी उम्र में अदम्य साहस दिखाया, वहीं अजय की पत्नी गीता ने पंचकुला के अल्केमिस्ट अस्पताल में स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट के तहत अपनी किडनी इफरा की मां को दान की।
बुधवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान मीडिया से बात करते हुए, डॉ नीरज गोयल, अल्केमिस्ट में किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन व यूरोलॉजिस्ट ने कहा कि जुबैदा बानो (47) 2 साल से अधिक किडनी की बीमारी से पीडि़त थीं। वह श्रीनगर के एक अस्पताल में नियमित डायलिसिस करवा रही थी। पिछले 1 वर्ष से उनकी हालत ज्यादा बिगडऩे लग पड़ी थी।
डॉ नीरज ने आगे बताया कि शुरू में उनके पति अपनी किडनी दान करने के लिए तैयार थे, लेकिन मेडिकल जांच में उन्हें किडनी दान के लिए अयोग्य पाया गया। यहां तक कि उनकी बेटी इफरा को भी ब्लड मिस्मेच के कारण अयोग्य पाया गया। डॉ नीरज ने कहा कि मैचिंग ब्लड ग्रुप वाला परिवार में कोई अन्य नहीं था।
सौभाग्य से उसी समय, यमुनानगर के अजय कुमार (33) गंभीर किडनी की समस्या से परेशान अल्केमिस्ट पहुंचे। उनकी हालत भी बहुत गंभीर थी और जल्द से जल्द किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता थी, डॉ नीरज ने कहा।
दोनों रोगियों के विस्तृत विश्लेषण पर, यह पाया गया कि ये दोनों रोगी पेअर एक्सचेंज किडनी ट्रांसप्लांट के लिए फिट थे, जो कानूनी व मेडिकल रूप से सही विकल्प था। टिशू मेचिंग की गई और दोनों किडनी संबंधित डोनर से पूरी तरह से मेचिंग पायी गयी ।
डॉ रमेश कुमार, सीनियर कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजी ने बताया कि जम्मू कश्मीर और हरियाणा के संबंधित स्टेट अथॉरटीज़ से आवश्यक कानूनी अनुमति के बाद ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक अल्केमिस्ट में किया गया। दोनों मरीज अब सामान्य जीवन जी रहे हैं ।
अजय की पत्नी गीता ने कहा कि इफरा एक एन्जल की तरह हमारे जीवन में तब आई जब उसके पति को तत्काल किडनी ट्रां