न डरें शनि की साढ़ेसाती या ढैयया से – मदन गुप्ता सपाटू

चंडीगढ़ – शनि ग्रह हमारे सौर मंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है. यह हमारे सौर मंडल का 6वां ग्रह है और ये सबसे दूर का वो ग्रह है जिसे नग्न आंखों से देखा जा सकता है. शनि की खोज खगोल वैज्ञानी गैलीलियो ने साल 1610 में की थी. शनि ग्रह से बड़ा ब्रहस्पति यानि के जुपिटर ग्रह है.

यह सूर्य से लगभग 142 करोड़ 66 लाख 66 हजार 421 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.शनि ग्रह की सतह का औसतन तापमान लगभग -139 डिग्री सेलसियस है.आकार में पृथ्वी से नौ गुना बड़ा ग्रह है.शनि ग्रह लोहा, निकल और चटानों के कोर से बना हुआ है ये धातु हाइड्रोजन की परत से घिरी हुई है. शनिपर 10 घंटे और 39 मिनट का एक दिन होता है.

पृथ्वी पर एक साल में लगभग 365 दिन होते हैं पर शनि ग्रह पर 10,759.22 दिनों का एक साल होता है. इसी के साथ ही शनि ग्रह के 62 चन्द्रमा है.

नौ ग्रहों में शनि को न्यायाधीश माना गया है। शनि गुरुवार, 23 जनवरी को धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेगा। ये ग्रह एक राशि में करीब ढाई साल रुकता है। कई बार शनि वक्री होकर भी राशि बदलता है, लेकिन इस साल ऐसा नहीं होगा। 2020 में शनि वक्री होगा, लेकिन राशि नहीं बदलेगा यानी पूरे साल ये ग्रह मकर राशि में ही रहेगा। शनि सोमवार, 11 मई को वक्री होगा। मंगलवार, 29 सितंबर को शनि फिर से मार्गी हो जाएगा।

एक राशि पर शनि ढाई वर्ष रहता है। शनि जन्म राशि से 12वें भाव, पहले भाव या दूसरे भाव में गोचर करेगा तब साढ़ेसाती होती है। जैसे-इस समय शनि धनु राशि में शनि भ्रमण कर रहा है। मान लीजिए आपकी राशि मकर है और शनि धनु राशि में गोचर करेगा तो धनु से दूसरा स्थान मकर राशि हुई। अतः मकर राशि साढ़ेसाती प्रारम्भ हो रही है। शनि गोचर से 12वें स्थान पर हो तो साढ़ेसाती सिर पर रहेगी, शनि जन्म राशि में हो तो साढ़ेसाती ह्रदय पर रहेगी और यदि शनि जन्म राशि से दूसरे स्थान में हो तो साढ़ेसाती पैर पर रहेगी।

शनि की कुल दशा 19 वर्ष होती है और इसके अलावा साढ़ेसाती तथा दो ढैय्या का समय जोड़ा जाए तो शनि किसी के भी जीवन को लगभग 31 साल तक प्रभावित करता है। तो यदि आपकी राशि में इस समय शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही है तो वह समाप्त होने के ठीक 30 या 31 साल बाद फिर से आएगी यह तय है।

किन राशि पर शुरू होगी शनि की साढ़ेसाती ?

शनि के राशि बदलने से 23 जनवरी के बाद वृश्चिक राशि की साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी। वृषभ और कन्या राशि का ढय्या उतर जाएगा। मकर राशि में शनि का प्रवेश होने से कुंभ राशि पर साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। इस राशि पर साढ़ेसाती का पहला ढय्या रहेगा। मकर राशि पर दूसरा और धनु राशि पर अंतिम ढय्या रहेगा। मिथुन और तुला राशि पर शनि का ढय्या शुरू हो जाएगा।

मेष राशि- इस राशि पर 26 जनवरी के बाद शनि की ढैय्या का असर पूरी तरह समाप्त हो जायेगा। बिजनेस, नौकरी, स्वास्थ्य आदि मामलों यह वर्ष अनुकूल सिद्ध होगी। नई कार्य योजनाओं में किया गया निवेश भी लाभप्रद साबित होगा। पिता के स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है।

वृष-अगर आपकी चन्द्र राशि वृष है तो आप पर शनि की ढैय्या का असर रहेगा। यानि आने वाले 2 वर्ष 6 माह तक कुछ लोगों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जूझना होगा। परिवार में तनाव की स्थिति रह सकती है। बड़े निवेश से बचना होगा एंव आर्थिक लेन-देन में सावधानी बरतें। कन्या राशि-इस राशि के जातकों के उपर शनि की ढैय्या का प्रभाव रहेगा। अपने बॉस से तालमेल बनायें रखें एंव ऑफिस किसी से बहस न करें। प्रेमी वर्ग इस समय विशेष सावधानी बरतें। अगर किसी से प्रेम करते है तो प्रपोज करने से बचें। कुछ लोगों को स्वास्थ्य से सम्बन्धित दिक्कतें हो सकती है।

मिथुन -शनि का गोचर अष्टम भाव में हो रहा है । शनि परिवर्तन बहुत ही अशुभ रहेगा, ये समय आपके लिए अच्छा नहीं है । आपका अपने परिवार से झगड़ा भी हो सकता है। परेशानियाँ और भी बड़ सकती है इसलिए अपनी वाणी पर संयम रखना होगा । और आपके दोस्त से धोखा भी मिल सकता है । ये समय आपके लिए अच्छा नहीं है इसलिए आपको बहुत सचेत रहना होगा ।आपको किसी भी कार्य क्षेत्र में उच्च अधिकारियों के साथ मतभेद भी हो सकता है। शनि की राशि परिवर्तन में आपको बहुत ही सोच-समझ कर चलना होगा ताकि आपको कोई हानि न हो सके ।

कर्क -शनि का गोचर सप्तम् भाव में हो रहा है।शनि का राशि परिवर्तन बहुत ही शुभ रहेगा ।जो जातक विवाह के लिए इच्छुक है उनके लिए ये समय अच्छा संदेश लाने वाला है।बहुत ही शुभ समाचार मिलने वाला है जो लोग वैवाहिक जीवन जीना चाह रहे है उनके विवाह के लिए ये समय बहुत ही शुभ है।किसी धार्मिक स्थल पर भी जा सकते है उनके लिए भी ये समय बहुत अच्छा रहेगा ।अगर कोई अपनी नौकरी के लिए प्रयास कर रहा है उन्हें नौकरी मिल सकती है। इसलिए आपको बहुत सोच-समझ कर अपना कार्य करना होगा ।

सिंह -शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए मुख्य रूप से सामान्य रहेगा ,अगर आपके  लिए ज्यादा अच्छा नहीं है ,तो बुरा भी नहीं है।किसी रोग से छुटकारा मिलने की संभावना हो रही है।आपका कोई खास दोस्त जो किसी कारण से आपका सच्चा साथी बन सकता है उसके लिए  आपको अपनी वाणी पर संयम रखना होगा,ताकि आपको पूर्ण रूप से लाभ मिल सके।कचहरी के क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। लेकिन ये समय आपके ससुराल पक्ष से परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, और आपके खर्चे भी बहुत ज्यादा बड़ सकते है।अगर आप किसी यात्रा पर जाना चाहते है.। तो आपका योग बन रहा है आपको यात्रा पर जाने में सफलता प्राप्त होगी पर कुछ रुकावटों के बाद ।

कन्या- शनि गोचर शुभ व लाभकारी है, और इस राशि परिवर्तन से आपको संतान की प्राप्ति होगी ।ये समय आपके करोवार को बरकत देगा । आपका रुके हुआ सारे काम बनेंगे ।इस समय विद्यार्थियों को भी अनेक लाभ मिलने का योग है ।अगर कोई भी विद्यार्थी अपने मनपसंद कालेज में एडमिशन लेना चाहते है ,तो उन विद्यार्थियों के लिए ये समय बहुत ही शुभ और अच्छा है।लेकिन इस समय आपको आपने बड़ो से नोकझोंक होने की संभावना हो सकती है ।आपको अपने वैवाहिक जीवन में भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आपका यात्रा पर जाने का योग बन सकता है मगर सफर के दौरान अपने  समान का ध्यान ज़रूर रखे।

तुला -इस राशि के जातकों के पर शनि की साढ़ेसाती समाप्त हो जायेगी। जॉब वाले लोगों को अच्छा प्रमोशन मिल सकता है एंव व्यवसाय में प्रगति होगी। कुल मिलाकर इस राशि से जुड़े लोगों के उपर शनि देव की अनुकूल कृपा बनी रहेगी। कुछ लोगों के घर में मॉगलिक कार्य होंगें। बिगड़े हुये कार्य बनेंगे तथा आर्थिक स्थिति में मजबूती आयेगी। दाम्प्त्य जीवन में अच्छा सामंजस्य बना रहेगा।

वृश्चिक -इस राशि के जातको के पैरों पर साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा जो अगले 2 वर्ष 6 माह तक रहेगा।। इस राशि वालों के पैरों पर साढ़ेसाती रहने के कारण वृश्चिक राशि वालों को सावधान रहना होगा। गठिया रोगियों को अपने खान-पान पर विशेष सावधानी बरतनी होगी। इस राशि में जिनका जन्म ज्येष्ठा नक्षत्र में हुआ है, उन्हें अपने कार्यो के प्रति विशेष सर्तक रहना होगा। मित्रों से धोखा, स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव एंव कर्ज व व्याज आदि में हानि उठानी पड़ सकती है। इस राशि वालों को इन दिनों यात्राओं से बचना होगा। सोंच-समझकर ही निवेश करें अन्यथा हानि हो सकती है।

धनु -इस राशि वालों पर भी साढ़ेसाती का प्रभाव देखने को मिलेगा। धनु राशि वालों पर साढ़ेसाती धन हानि, शारीरिक पीड़ा, कार्यो में रूकावट, परिवारिक समस्याओं से जूझना होगा। क्रोध पर नियन्त्रण रखना होगा अन्यथा और मुसीबत में फॅस सकते है। इस वर्ष की अपेक्षा अगले वर्ष इस राशि वालों को विशेष कष्ट का सामना करना पड़ सकता है। खासकर ह्रदय रोगियों को विशेष सावधान रहने की जरूरत है। खान-पान में सावधानी बरतें वरना नयें लोग भी ह्रदय रोग से पीडि़त हो सकते है।

मकर – इस राशि के लिए प्रथम चरण में शनि की साढ़ेसाती अच्छी रहेगी। किन्तु फिर भी शनिदेव की आराधना करें। सन्तान को पीड़ा हो सकती है। पूरे वर्ष मकर राशि पर शनि की का प्रभाव रहेगा। जिस कारण इन्हें धन, परिवार, स्वास्थ्य आदि से सम्बन्धित रूकावटें आयेंगी। रिस्की कार्यो से बचना होगा। व्यापारी वर्ग को ज्यादा निवेश करने से बचना होगा। स्वास्थ्य के मामलें में की गई लापरवाही मंहगी साबित हो सकती है। मकर राशि शनि की ही राशि इसलिए शनिदेव आपको ज्यादा परेशान नहीं करेंगे।

कुम्भ-खर्चो को बढ़ावा देगा और आपको व्यापार से संबन्धित कार्यों में हानि होने का डर सता सकता है। इसलिए आपको बहुत सोच समझ कर कदम उठाना होगा ।साढ़े साती  शुरू । आपको कोई भी पुराना रोग भी फिर से परेशान कर सकता है।आपको शत्रुओं  सावधान रहना होगा । आपको अपना कोई भी कार्य आपने भाग्य पर नहीं छोडना है।

मीन – आपके धन यानी आय को वरकत देगा। जिससे आपके करोवार में उन्नति होगी ।इस समय आपको कोई शुभ समाचार भी मिल सकता है। आपकी सैलरी भी बढ़ सकती है । आपको आपने कार्यक्षेत्र में भी काफी मन सम्मान मिलेगा ।आप इस समय इतने व्यस्त रहेंगे जिसके कारण आप आपने पार्टनर को भी समय नहीं दे पाएंगे

शनिदेव को प्रसन्न करने के  उपाय

शनि अमावस्या के दिन शुभ शुभ मुहूर्त में सुन्दरकाण्ड या हनुमान चालीसा का का 21 आवृति पाठ करें.

काली गाय की सेवा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं. काली गाय के सिर पर रोली लगाकर सींगों में कलावा बांधकर धूप-आरती करें फिर परिक्रमा करके गाय को बून्दी के चार लड्डू खिला दें.

हनुमान जी का पूजन

सूर्यास्त के बाद हनुमानजी का पूजन करें. पूजन में सिन्दूर, काली तिल्ली का तेल, इस तेल का दीपक एवं नीले रंग के फूल का प्रयोग करें.

शनि देव के नाम

इन 10 नामों से शनिदेव का पूजन करें: कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंद व पिप्पलाद.

रुद्राक्ष की माला

सुबह प्रातः काल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर कुश के आसन पर बैठ जाएं. सामने शनिदेव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें व उसकी पंचोपचार से विधिवत पूजन करें. इसके बाद रूद्राक्ष की माला से नीचे लिखे किसी एक मंत्र की कम से कम पांच माला जप करें तथा शनिदेव से सुख-संपत्ति के लिए प्रार्थना करें.

काले चने का भोग

सवा-सवा किलो काले चने अलग-अलग तीन बर्तनों में भिगो दें. इसके बाद नहाकर, साफ वस्त्र पहनकर शनिदेव का पूजन करें और चनों को सरसो के तेल में छौंक कर इनका भोग शनिदेव को लगायें. इसके बाद पहला सवा किलो चना भैंसे को खिला दें. दूसरा सवा किलो चना कुष्ट रोगियों में बांट दें और तीसरा सवा किलो चना अपने ऊपर से उतार कर किसी सुनसान स्थान पर रख आयें

काला धागा

काले धागे में बिच्छू घास की जड़ को अभिमंत्रित करवा कर धारण करने से भी शनि संबन्धी सभी कार्यों में सफलता मिलती है.

भैरवजी की उपासना करें और शाम के समय काले तिल के तेल का दीपक लगाकर शनि दोष से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें.

लाल चन्दन की माला

लाल चन्दन की माला को अभिमंत्रित कर पहनने से शनि के अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं.

मांस मदिरा का सेवन त्यागें

यदि आप पर शनि की साढ़ेसाती, ढय्या या महादशा चल रही हो तो इस दौरान मांस, मदिरा का सेवन न करें. इससे भी शनि के दुष्प्रभाव में कमी आती है.

सरसों के तेल का दीपक

शाम के समय बड़ (बरगद) और पीपल के पेड़ के नीचे सूर्योदय से पहले स्नान आदि करने के बाद सरसो के तेल का दीपक लगायें और दूध एवं धूप आदि अर्पित करें.

डाकोत को दान

एक कांसे की कटोरी में तिल का तेल भर कर उसमें अपना मुख देख कर और काले कपड़े में काले उड़द, सवा किलो अनाज, दो लड्डू, फल, काला कोयला और लोहे की कील रख कर डाकोत (शनि का दान लेने वाला) को दान कर दें.

काला कोयला

सुबह स्नान आदि करने के बाद सवा किलो काला कोयला, एक लोहे की कील एक काले कपड़े में बांधकर अपने सिर पर से घुमाकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें और किसी शनि मंदिर में जाकर शनिदेव से प्रार्थना करें.

रोटी खिलाना

चोकर युक्त आटे की 2 रोटी लेकर एक पर तेल और दूसरी पर शुद्ध घी लगाएं. तेल वाली रोटी पर थोड़ा मिष्ठान रखकर काली गाय को खिला दें. इसके बाद दूसरी रोटी भी खिला दें और शनिदेव का स्मरण करें.

काले धागे की माला

अपने दाहिने हाथ के नाप का उन्नीस हाथ लंबा काला धागा लेकर उसको बटकर माला की भांति गले में पहनें. इस प्रयोग से भी शनिदेव का प्रकोप कम होता है.

मछलियों को काला चना

शनि जयंती के एक दिन पहले यानी मंगलवार की रात काले चने पानी में भिगो दें. शनि जयंती के दिन ये चने, कच्चा कोयला, हल्की लोहे की पत्ती एक काले कपड़े में बांधकर मछलियों के तालाब में डाल दें. यह टोटका पूरा एक साल करें. इस दौरान भूल से भी मछली का सेवन न करें.

बन्दरों और काले कुत्तों की सेवा

शनि जयंती और प्रत्येक शनिवार के दिन बंदरों और काले कुत्तों को बूंदी के लड्डू खिलाने से भी शनि का कुप्रभाव कम हो जाता है अथवा काले घोड़े की नाल या नाव में लगी कील से बना छल्ला धारण करें.

शमी वृक्ष की जड़

शमी वृक्ष की जड़ को विधि-विधान पूर्वक घर लेकर आयें. शनिवार के दिन श्रवण नक्षत्र में या शनि जयंती के दिन किसी योग्य विद्वान से अभिमंत्रित करवा कर काले धागे में बांधकर गले या बाजू में धारण करें. शनिदेव प्रसन्न होंगे तथा शनि के कारण जितनी भी समस्यायें हैं, उनका निदान होगा.

शनि यन्त्र की स्थापना

शनि यंत्र की स्थापना व पूजन करें. इसके बाद प्रतिदिन इस यंत्र की विधि-विधान पूर्वक पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं. प्रतिदिन यंत्र के सामने सरसों के तेल का दीप जलाएं. नीला या काला पुष्प चढ़ाएं ऐसा करने से लाभ होगा.