पॉल्यूशन को कम करने के लिए हरियाणा सरकार ने 1304 करोड़ रुपए की योजना को दी स्वीकृति: रमन मलिक

गुरुग्राम: हरियाणा सरकार ने प्रदेश में पराली प्रबंधन के लिए 1,304।95 करोड़ रुपए की एक बड़ी योजना को स्वीकृति प्रदान की है। इसका मकसद राज्य में फसल अवशेषों को जलाने से रोकना है। सरकार ने फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन योजना के तहत केंद्र सरकार को 639.10 करोड़ रुपए की वार्षिक योजना शुरू की है। जिससे पॉल्यूशन से काफी हद तक राहत मिल सकेगी। यह बात शनिवार को भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रमन मलिक ने कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपकरण वितरित करने, कस्टम हायरिंग सेंटर  बनाने एवं कंट्रोल रूम बनाने सहित पुआल के प्रबंधन के लिए हर संभव उपाय कर रही है।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत गैर-बासमती उत्पादकों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सात दिनों के भीतर 100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। इसके लिए 1,000 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से छोटे और सीमांत किसानों की मदद कर सकती है।
मलिक ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता वह उनको बस आने वाले पूछते हैं कि केंद्र सरकार ने प्रदेशों को एकजुट क्यों नहीं लाया? लेकिन वह यह नहीं बताते कि आयुष्मान योजना के लिए जिसमें गरीब को फायदा होता है केंद्र सरकार गरीब की दुहाई देती रह जाती है, लेकिन यह लोग अपनी राजनीति चमकाते हैं। गरीब को इलाज नहीं लेने देते। मलिक ने जवाब दिया कि अगर केंद्र सरकार हरियाणा और उत्तर प्रदेश के साथ काम कर सकती है तो पंजाब और दिल्ली केंद्र के साथ काम क्यों नहीं कर सकते। बार-बार आम आदमी पार्टी के लोग बोलते हैं कि हमने वातावरण को देखकर पावर प्लांट को बंद कर दिया है और दूसरी तरफ बोलते हैं कि हम 24 घंटे बिजली दे रहे हैं तो यह बिजली आ कहां से रही है। यह बिजली हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बिजली उत्पादन प्लांटों से आ रही है और फिर बोलते हैं कि हमारी मदद कौन कर रहा है।

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