प्राकृतिक चिकित्सा समिति, चण्डीगढ़ के तत्वाधान में प्राकृतिक चिकित्सा दिवस (नैचुरोपैथी डे) मनाया

चण्डीगढ़ः 18.11.19 को गांधी स्मारक भवन, सैक्टर 16 ए, चण्डीगढ़ में प्राकृतिक चिकित्सा समिति, चण्डीगढ़ के तत्वाधान में प्राकृतिक चिकित्सा दिवस (नैचुरोपैथी डे) मनाया गया। प्रातः 6:30 बजे ‘रन फॉर नैचुरोपैथी’ का आयोजन सुखना लेक पर किया गया जिसमें लगभग 200 लोगों ने भाग लेकर प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति लोगों को जागरूक किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता के. के. शारदा ने की।
प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. एम. पी. डोगरा, अध्यक्ष प्राकृतिक चिकित्सा समिति, ने प्राकृतिक उपचार पर बोलते हुए कहा कि 90%-95% रोग तो जीवनशैली में बिगाड़ की वजह से उत्पन्न हो रहे हैं। हम प्रकृति से जितना दूर जा रहे हैं उतना ही हम रोगों से घिरते जा रहे हैं। हम प्राकृतिक जीवन और संयमित जीवनशैली से इन रोगों से बच सकते हैं। प्राकृतिक चिकित्सा कहती है कि यदि हम प्रकृति के अनुसार चलें तो हम रोगी होंगे ही नहीं, एवं हमें दवाईंयाँ लेने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। मौसमी फल एवं सब्जियों का सेवन करें, मोटे अनाज को अपने खान-पान में शामिल करें, भूख अनुसार टुकड़ों-टुकड़ों में खाएं, उचित मात्रा में पानी पीएं, जल्दी सोएं और जल्दी उठें एवं योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। ऐसा करके हम स्वस्थ एवं निरोगी काया पा सकते हैं।
के. के. शारदा, अध्यक्ष गांधी स्मारक निधि, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल एवं चण्डीगढ़ ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि स्वस्थ रहना प्रत्येक मनुष्य के हाथ में है अर्थात उसे प्रकृति से समन्वय रख कर अपनी जीवन शैली अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों में एक नैचुरोपैथी कैबिन बनाया जाना चाहिए जिसमें हम प्राकृतिक चिकित्सा से ईलाज कर सकें एवं लोगों को जागरूक कर सकें कि कैसे प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा हम बिना दवाईयों के स्वस्थ रह सकते हैं। यह बात उन्होंने गांधी जी की 150वीं जयन्ती पर माननीय श्री वी.पी.सिंह बदनौर, महामहिम राज्यपाल पंजाब एवं प्रषासक चंडीगढ़, के समक्ष भी रखी थी।
डॉ. देवराज त्यागी, सचिव प्राकृतिक चिकित्सा समिति, चण्डीगढ़ ने बताया कि भवन में एक आउटडोर प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र पिछले 15 वर्षों से चल रहा है तथा हमारे प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. एम. पी. डोगरा एवं डॉ. पूजा द्वारा अब तक हज़ारों रोगी लाभ उठा चुके हैं। सरकार ने 18 नवम्बर को प्राकृतिक चिकित्सा दिवस घोषित किया है जो कि प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार की ओर एक सकारात्मक कदम है तथा साथ ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को यह सच्ची श्रद्धांजलि है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल, शशि बंसल ने भी ‘रन फाॅर नैचुरोपैथी’ में भाग लिया।
कार्यक्रम में डॉ. रमेश कुमार, कंचन त्यागी, डॉ. कमलजीत कौर, पापिया, गुरप्रीत, ऊषा शर्मा, पूनम शर्मा, रमा, मुकेश अग्रवाल, अरूण नैथानी, सिमरन, जोगीन्दर, तृप्ता, ममता, एच. सी. गुप्ता, देवराज छाबड़ा, मीनू, शशि एवं बलदेव जी आदि ने भाग लिया।