फसल विविधिकरण समय की मांग: डॉ. रामनिवास ढांडा

पंचकूला, 23 जून: चैधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र पंचकूला में एक ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रामनिवास ढांडा बतौर मुख्यातिथि शामिल हुए। वेबिनार का विषय स्थायी कृषि प्रणाली रखा गया।

कृषि विज्ञान केंद्र में ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन |

डाॅ. ढांडा ने कहा कि परंपरागत खेती में बदलाव करते हुए फसल विविधीकरण पर जोर देना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है, जो पर्यावरण के लिए एक खतरा है। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए कृषि में विज्ञान और तकनीकी को शामिल किया जाना बहुत ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज का युग तकनीकी का युग है। मौसम में हो रहे बदलाव, घटते भूमिगत जलस्तर, मुक्त बाजार, घटती हुई जोत और कम होती जमीन की उपजाऊ शक्ति, सीमित  कृषि योग्य क्षेत्र हमारे सामने बहुत ही कठिन चुनौतियां हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान करते हुए कहा कि अब हमारा लक्ष्य सीमित संसाधनों का आधुनिक तकनीक के प्रयोग से अधिकाधिक लाभ उठाते हुए किसान की आय में बढ़ोतरी करना होना चाहिए और किसानों को भी चाहिए कि वह कृषि वैज्ञानिकों की सलाह अनुसार और विश्वविद्यालय द्वारा सिफारिश किए गए उर्वरकों का ही इस्तेमाल करें।

समन्वित कृषि प्रणाली एकमात्र विकल्प: डॉ. श्रीदेवी तल्लापगड़ा

केंद्र की इंचार्ज श्रीदेवी तल्लाप्रगड़ा ने कहा कि वर्तमान समय में एकल फसल प्रणाली को छोडक़र समन्वित कृषि प्रणाली को अपनाना ही एकमात्र विकल्प है। इससे किसानों की आमदनी मेें इजाफा हो सकता है। उन्होंने कहा कि फसलों में कीड़े, मकोड़े व बीमारियों से कहीं ज्यादा नुकसान खरपतवार करते हैं, इसलिए इसके बचाव हेतू प्रमाणित बीज, सही किस्म का चुनाव, बिजाई का उचित समय, गुणवत्ता वाली गोबर की खाद, खरपतवारों का फूल व बीज बनने से पहले ही नियंत्रण करना कारगर साबित होता है। उन्होंने कहा कि फसलों में बीमारियों की रोकथाम के लिए बीज उपचार करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि ज्यादा खाद व पानी इस्तेमाल करने से भी पौधों में रोग लग जाते हैं।

वर्तमान समय में इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि परंपरागत कृषि पद्धति में बदलाव करके किसानों को फल-फूल सब्जी व औषधीय खेती की ओर ध्यान देना चाहिए, जिससे किसानों की आमदनी में भी इजाफा हो सके। उपभोक्ता, बाजार, व्यापार और मार्केट की मांग के अनुरूप फसलों का उत्पादन किया जाना चाहिए ताकि किसान को अधिक से अधिक लाभ हासिल हो सके। कृषि विभाग की ओर से डॉ. जयप्रकाश ने विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
मत्स्य विज्ञानी डॉ. गजेंद्र सिंह ने किसानों को लिए मछली पालन के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए इसकी शुरुआत में आने वाली परेशानियों व उनके समाधान के बारे में बताया। कार्यक्रम मेें सस्य वैज्ञानिक डॉ. वंदना, पौध रोग वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र, डॉ. राजेश लाठर ने भी अपने विचार रखे। डॉ. गुरनाम सिंह ने कार्यक्रम में शामिल होने पर सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। वेबिनार में क्षेत्र के किसानों,  कृषि अधिकारियों और कृषि विज्ञान केंद्र के कर्मचारियों ने ऑनलाइन माध्यम से हिस्सा लिया।