बच्चे कहीं सोशल मीडिया की दुनिया में ना खो जाएं: अनिल मलिक

चंडीगढ़, सफीदों: बड़े-बुजुर्गों के माध्यम से किस्से-कहानियों के जरिए चली आ रही पारंपरिक शिक्षा प्रणाली तथा प्रौद्योगिकी के तकनीकी दौर में माता-पिता पेरेंटिंग को लेकर कहीं ना कहीं खुद को दोराहे पर खड़ा महसूस कर रहे हैं। उनके मन में बहुत से सवाल भी चल रहे हैं कि बच्चों को पूरी आजादी दे और नैसर्गिक रूप से बढऩे दें। उनका पालन-पोषण होता रहे या फिर पूरी निगरानी और नियंत्रण में रखें ताकि वे इस गला काट प्रतिस्पर्धा के दौर में टिके रह सके। यह बात गांव रामपुरा स्थित न्यू बीएसएम स्कूल में मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी रोहतक एवं राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक ने कही। उन्होंने कहा कि नि:संदेह माता-पिता की जिम्मेदारी बच्चों के जीवन को बेहतर तरीके से संभालने, संबल देने और उनकी सुरक्षा करने की है। पारिवारिक संस्था बच्चों को बेहतर प्रारंभिक शिक्षा और मार्गदर्शन प्रदान करें तो भविष्य जीवन की बेहतरी संभव है। ऐसा सहज, शांत, शालीन, मित्रवत पारिवारिक माहौल तैयार करें कि बच्चा हमेशा आपसे बातचीत को तत्पर रहें व मन की बातें साझा करता रहे। आप बच्चों को अपने अंदर की कमजोरियां, बुराइयां, नकारात्मकता, ईष्र्या, निराशा और हताशा से लडऩा सिखाएं।

बच्चों को ऐसा वातावरण दे जिसमें बच्चों को सम्मान, स्वीकृति, प्रोत्साहन, प्रेरणा, प्रशंसा मिले क्योंकि बच्चे गीली मिट्टी के समान हैं उन्हें चाहे जैसा रूप दे सकते हैं। कभी भी अपने बच्चों की तुलना दूसरों से मत करें, उनका तिरस्कार मत करें, दूसरों के सामने उनकी कमजोरियों की चर्चा ना करें। समय की गुणवत्ता का महत्व समझें, ऐसा ना हो कि सोशल मीडिया की आभासीय दुनिया में कहीं खो ना जाएं। अभिवावकों को बच्चों को सिर्फ शिक्षित ही नहीं प्रशिक्षित भी करना होगा। इस मौके पर स्कूल निदेशक अरुण खर्ब, प्रिंसिपल अनिल खर्ब, समाजसेवी विश्वदीप व प्रवीण मौजूद थे।