बदसलूकी को लेकर पत्रकारों ने किया स्वतंत्रता दिवस समारोह का बहिष्कार 

 

चंडीगढ़, सफीदों: सफीदों के पत्रकारों ने पुलिसिया बदसलूकी को लेकर नगर के रामलीला मैदान में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में चल रहे उपमंडल स्तरीय समारोह का बहिष्कार कर दिया। रविवार को मीडिया कर्मी रामलीला मैदान में पहुंचे तो जरूर लेकिन वहां पर उन्होंने कार्यक्रम की कवरेज करने की बजाए अपना विरोध जाहिर किया। पत्रकारों के कार्यक्रम के विरोध की भनक प्रशासन व पुलिस को लगी। प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार रामपाल शर्मा, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से अनिल कुमार व एसएचओ सदर कृष्ण कुमार खर्ब पत्रकारों के पास पहुंचे और उन्हे मनाने का प्रयास किया लेकिन पत्रकार प्रशासन के सामने अपनी बात रखकर समारोह से वाकआऊट कर गए। पत्रकारों का कहना था कि 13 अगस्त को नगर के खानसर चौंक पर स्थित एक गैस्ट हाऊस में 5 युवक-युवतियों के जोड़े पकड़े गए थे। इस घटना की कवरेज करने के लिए वहां पर पत्रकार पहुंचे थे। पुलिस ने पत्रकारों को वह कवरेज करने से रोकने का प्रयास किया और कहा कि यहां कोई फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी नहीं करनी है। पुलिस द्वारा पत्रकारों को धमकाया गया कि अगर कवरेज की तो अंजाम अच्छा नहीं होगा। इन धमकियों के बावजूद पत्रकार अपने कार्य में लगे रहे। जिससे बौखलाकर सिटी एसएचओ महेंद्र सिंह ने पत्रकारों को दादागिरी दिखाते हुए बदसलूकी की तथा उनके साथ धक्कामुक्की की। इसके अलावा एक पत्रकार के गिरेबान तक हाथ डाल दिया। एसएचओ सिटी महेंद्र सिंह ने पत्रकारों को घटना के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी। उनके हावभाव से ऐसा लग रहा था कि जैसे वे इस मामले में दबाना चाहते है या आरोपियों के साथ उनकी सांठगांठ हो गई है। पुलिस गैस्ट हाऊस में प्रवेश करने के करीब एक से डेढ घंटे के बाद युवक-युवतियों को लेकर बाहर निकली। इसके अलावा पुलिस ने कवरेज के लिए पत्रकारों को गैस्ट हाऊस में प्रवेश नहीं करने दिया। अगले दिन पत्रकारों मामले की अपडेट लेने के लिए सिटी थाना पहुंचे तो वहां पर भी उनके साथ बदसलूकी की गई। थाना प्रभारी ने मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि वे लड़के-लड़की कौन थे? गैस्ट हाऊस मालिक व युवक-युवतियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की? वे लड़के व लड़की हिरासत में है या उन्हे छोड़ दिया गया है। इतना ही नहीं एसएचओ ने फिर से बौखलाकर पत्रकारों के वाहनों तक को थाने से बाहर निकलवा दिया। पत्रकारों का कहना था कि भारतीय लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ बताया गया है और भारत में मीडिया को स्वतंत्रता प्रदान की गई है। इसके विपरित सिटी थाना प्रभारी चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता को अपनी घटिया मानसिकता व दादागिरी से दबाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन सफीदों क्षेत्र के पत्रकार ना तो कभी दबे है और ना ही दबेंगे। उनका कहना था कि भारत अपनी आजादी का 75वां वर्ष मना रहा है और इस आजादी में पत्रकारों का अहम योगदान रहा है। पत्रकारों ने साफ किया कि वे इस मामले को लेकर सीएम मनोहर लाल, गृहमंत्री अनिल विज व पुलिस के उच्चाधिकारियों से मिलेंगे।