महामंडलेश्वर ने किया शिष्या को गर्भवती, कैलाशानंद बोले, महिला के आरोप झूठे

नई दिल्लीः उज्जैन कुंभ मेले में हरिद्वार के अग्नि अखाड़ा के जिस महामंडलेश्वर बाबा रसानंद की संदिग्ध मौत हो चुकी है , उन्हीं बाबा के साथ पिछले आठ साल से आश्रम में रहने वाली अविवाहित शिष्या गर्भवती हो गई। शिष्या ने पेट में पल रहे बच्चे का जिम्मेदार बाबा रसानंद को ठहराया है, जो कि खुद को ब्रह्मचारी बताते घूमते थे। शिष्या के इस खुलासे के बाद हरिद्वार आश्रम में हंगामा मचा है। आश्रम की देखरेख कर रहे दूसरे बाबा ने कहा है कि शिष्या सौ करोड़ की संपत्ति हथियाना चाहती है। इस नाते आरोप लगा रही। शिष्या ने कहा है कि वह डीएनए कराने को तैयार है।

शिष्या ने कहा, बाबा ने मुझसे की थी चोरी से शादी
शिष्या तेजेंद्र कौर ने महामंडलेश्वर बाबा रसानंद पर गंभीर आरोप जड़े हैं। उसके मुताबिक बाबा ने चोरी छिपे उससे शादी की। उसे धर्मपत्नी का दर्जा दिया। जिसके कारण वह उनके साथ शिष्या ही नहीं बल्कि पत्नी की तरह रहती थी। उनसे संबंध के कारण ही वह पेट से हो गई। पेट में पल रहा बच्चा महामंडलेश्वर रसानंद का ही है।

प्रेसवार्ता कर शिष्या ने कहा, प्रमाण के लिए डीएनए कराने को तैयार
तेजेंद्र कौर ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जल्द ही उसकी डिलीवरी होने वाली है। संत का बच्चा न होने की बात जो लोग खारिज कर रहे हैं प्रमाण देने की जरूरत पड़ी तो वह बच्चे का डीएनए टेस्ट भी कराने को तैयार है।

कैलाशानंद बोले, महिला के आरोप झूठे
महामंडलेश्वर रसानंद के निधन के बाद उनके बाद सबसे बडे़ संत कैलाशानंद अग्नि अखाड़ा आश्रम देख रहे हैं। उन्होंने रसानंद की शिष्या तेजेंद्र कौर के आरोपों को झूठा बताया है। साथ ही यह भी कहा है कि बच्चा बाबा है किसका है, इसका सच जानने की वे कोई जरूरत नहीं समझते हैं।

रसानंद बाबा की उज्जैन कुंभ में हो चुकी है संदिग्ध मौत
हरिद्वार के अग्नि अखाड़ा के महामंडलेश्वर की बीते दिनों उज्जैन के कुंभ मेले में संदिग्ध मौत हो चुकी है। बाबा काफी शौकीन थे। 25 लाख की पजेरो से चलते थे। बाबा के पास पहले से एक 12 साल का बेटा है। जो आश्रम में ही रहता है। आश्रम की संपत्ति करीब सौ करोड़ की है। बाबा के पहला बेटा फिलहाल इस संपत्ति का वारिस है। रसानंद के निधन के बाद बाबा कैलाशानंद फिलहाल आश्रम की देखरेख कर रहे हैं।
कहा जा रहा कि अगर डीएनए टेस्ट से साबित हुआ कि शिष्या के बच्चे के पिता बाबा रसानंद हैं तो फिर आश्रम की आधी संपत्ति बाबा के पहले बेटे और शिष्या के बेटे के बीच बंटने की नौबत आएगी। आश्रम के लोग ऐसा नहीं चाहते हैं।