मात्र बहन की रक्षा नहीं अपितु सभी लोगों की सभी अभावों से रक्षा को बांधें रक्षा सूत्र – डॉ. चौहान

पंचकूला । भारतीय संस्कृति में रक्षा सूत्र के माध्यम से अपनी रक्षा हेतु सामने वाले को संकल्पित करने का चलन आदि काल से है । विशेष बात यह थी कि यह मात्र भाई बहन तक ही सीमित नहीं था अपितु इस प्रतीकात्मक रक्षा बंध को अनेक रूपों में एक दूसरे को बाँधा जाता रहा था । इसी भाव से प्रत्येक सामर्थ्यवान को विभिन्न आर्थिक -सामाजिक-मानसिक अभावों से रक्षा हेतु संकल्पित करने को रक्षा सूत्र बांधें । हरियाणा ग्रन्थ अकादमी के उपाध्यक्ष व निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रक्षाबंधन के अवसर ग्रामोदय व हरियाणा ग्रन्थ अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कवि सम्मलेन की अध्यक्ष के रूप में  भाई बहन के प्रेम को स्मरण करते हुए यह विचार रखे ।

हरियाणा ग्रन्थ अकादमी व ग्रामोदय के संयुक्त तत्वावधान में कवि सम्मेलन का आयोजन

मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में पधारे महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के उप-कुलपति डॉ. श्रेयांश द्विवेदी जी ने सभी को रक्षाबंधन व संस्कृत दिवस की शुभकामनाएं देते हुए भाई बहन के प्रेम व संस्कृत के महत्त्व पर अपने विचार रखे  ।

कोरोना काल के चलते एक बार फिर सभी कवि  तकनीक का प्रयोग कर ऑनलाइन जुड़े| कवयित्री राशि श्रीवास्तव के संचालन में मुंबई से कुंती नवल, मोहाली से नीरजा शर्मा, कैथल से मधु गोयल, कुरुक्षेत्र से सूबे सिंह सुजान, चंडीगढ़ से रजनी बजाज, पंचकूला से आभा मुकेश साहनी, सुनीता राणा, नीरू मित्तल ‘नीर’, शीला गहलावत सीरत ने अपनी-अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं ।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने राखी पर किये जा सकने वाले विभिन्न संकल्प अपनी रचना के माध्यम से सभी के साथ साझा किये –
पावन राखी पर्व पर , चल मितवा संकल्प कर
बहना को क्या कहना है  , तू अंगना का गहना है
भाई हर पल चोक्कन्ने हैं, तुम्हें अशंकित रहना है

मुंबई से कवयित्री कुंती नवल ने भाई बहन अनमोल दुलार अपनी रचना में पिरोते हुए कहा –
रक्षाबंधन का त्यौहार, बना रहे सदा भाई-बहन का प्यार
पवित्र रिश्ता अटूट अनमोल ये दुलार भरा ,भावनाओं का संसार
सदियों से चला आ रहा, पावन विश्वास से रक्षा का अधिकार।।

कवयित्री नीरजा शर्मा ने मोहाली से जुड़ते हुए परमात्मा से सभी भाई बहनों के लिए आशीष मांगे –
प्रभु से प्रार्थना है यही , हर आँगन बहन भाई से चहके
उनके प्यार से घर महके रक्षाबंधन का त्योहार इस रिश्ते को अटूट रखे।

पंचकूला की कवयित्री आभा मुकेश साहनी ने एक सैनिक की बहन के मनोभावों के अत्यंत मनोहारी शब्दों में प्रकट किया –
मत हटना सरहद से चाहे सूनी रखना तू कलाई
तू नही तो कौन हिन्द की हिफ़ाज़त करेगा भाई

कवयित्री सुनीता राणा ने पंचकूला से बहुत ही सुन्दर शब्दों में भाई बहन का वंदन व अभिनन्दन किया –
भाई बहन का बन्धन, सुंदर रिश्ते को हृदय से वंदन
एक ही है हम दोनों का स्पंदन, इस सुंदर रिश्ते का अभिनंदन

पंचकूला से कवयित्री नीरू मित्तल ‘नीर’ ने काग के द्वारा सैनिक की बहन के भाव उसकी कलाई तक पहुंचाते हुए कहा –
कागा रे तू जा कर छूना वीर मेरे की कलाई
डटा हुआ है सीमा पे जो दुश्मन पर आँख गड़ाई

कैथल से जुड़ी कवयित्री मधु गोयल ने एक बहन के मनोभावों को अपनी रचना में कुछ ऐसे प्रस्तुत किया –
मेरे भाई मुझ पर करना, इतना ये उपकार,
कर रही हूं विनती तुमसे, बन्द मत करना अपना द्वार।

चंडीगढ़ से जुडीं कवयित्री रजनी बजाज ने रक्षा बंधन के विभिन्न आयामों को अपनी रचना में एक सूत्र में पिरोत हुए कहा –
बांध के भाई की कलाई पर राखी लिया रक्षा का वचन
बांध के पेड़ों पर राखी दीया संरक्षण का वचन
रख कर उचित दूरी करोना में किया सुरक्षा का वचन
भेजी राखी सरहद पर जवानों ने निभाया देशभक्ति का वचन

पंचकूला की कवयित्री  शीला गहलावत सीरत ने मेघों के बरसाने के प्रभाव को बहुत ही सुन्दर शब्दों में प्रकट किया –
आसमान से बरसे हैं घन, पुलकित होता मेरा तन-मन
जबसे बारिश नाची आकर, हरा-भरा है मेरा आँगन

कुरुक्षेत्र से जुड़े कवि सूबे सिंह सुजान ने रक्षाबंधन की अवधारणा को बहुत ही खूबसूरत शब्दों में बयां किया –
रक्षाबंधन सजग प्रेम विस्तार है ।
भावना प्रेम रिश्तो का आधार है

कार्यक्रम संचालिका राशि श्रीवास्तव ने अपनी सुमधुर रचना में बहनों की ओर से भाइयों को शुभकामना देते हुए कहा –
राखी का धागा प्रेम से बांधा, भाई रहे खुश मेरा
मेरी उमर भी लग जाए तुझको, करती हूं ये दुआ