मैं बेगुनाह, मेरे केस की जाँच सीबीआई से हो या मुझे इच्छामृत्यु : कमल कोछर

चंडीगढ़ : फिरोज़पुर सेंट्रल जेल में क़त्ल की सजा भुगत रहे फिरोज़पुर कैंट निवासी कमल कोछर ने अपने आप को बेगुनाह ज़ाहिर करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, मानवाधिकार आयोग, पंजाब, कानून मंत्री, भारत सरकार, भारत के राष्ट्रपति से गुहार लगायी है की मामले की जाँच सीबीआई से करवाई जाये अन्यथा उन्हें इच्छा मृत्यु दे दी जाये |

चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कमल कोछर पुत्र स्व. मोहन लाल कोछर ने दुखी मन से आप बीती सुनते हुए कहा कि जिस क़त्ल के मामले में उन्हें उम्र कैद के सजा सुनाई गयी है, उस मामले से उनका कोई लेना देना नहीं है | कोर्ट फाइल में उनकी बेगुनाही के सभी दस्तावेज मौजूद ही नहीं है बल्कि पुलिस अधीक्षक (डिटेक्टिव) हरजीत सिंह पन्नू ने जाँच के दौरान उन्हें बेगुनाह पाया था और उनकी इस क़त्ल केस में किसी प्रकार कि कोई भागीदारी नहीं पाई गई है | कोर्ट में भी उन्होंने अपने गवाही के दौरान अपने यही ब्यान दर्ज़ करवाए | इस सब के बावजूद निराधार गवाहों के जरिये उन्हें उम्र कैद कि सजा सुना दी गयी | यही नहीं उनके साले दिनेश सोही को भी इस मामले में संलिप्त कर सजा सुना दी गई |

कमल कोछर ने बताया कि वे इस सजा के तीन साल कैद काट चुके हैं एवं अब पैरोल पर बहार हैं | उनके अनुसार जेल जीते जी नरक है व मैं बेगुनाह होते हुए भी कैद क्यों भुगतुं | उन्होंने कहा कि इस नरक भरी जिंदगी जीने से बेहतर है अपनी तथा मेरी तरह और इस प्रकार के नरक भरा जीवन भुगत रहे बेगुनाह साथी कैदियों के लिए भी आवाज उठाई जाये | उन्होंने कहा कि ना तो में भागूंगा ना ही में पीछे हटूंगा |

उन्होंने कहा कि वे अपने परिवार के पालन पोषण करने वाले एक मात्र सदस्य हैं | कमल कोछर ने बताया कि जेल जाने के बाद उनकी पत्नी सदमे में जी रही है  वहीँ उनके बच्चों कि शिक्षा, भरण पोषण पर भी सवालिया निशान खड़ा हुआ है |

कमल कोछर के अनुसार मुझे जानबूझ कर एवं बिना गवाहों व सबूतों के फंसाया गया है जिसके पीछे उनके खिलाफ कोई गहरी साज़िश रची गई थी | अगर अब भी प्रसाशन या न्यायपालिका हमारी गुहार नहीं सुनती है तो वे इच्छा मृत्यु कि चाहत रखते हैं क्योंकि नरक भरा जीवन जेल में जीने से अच्छा मर जाना है | कमल कोछर ने बताया की उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, मानवाधिकार आयोग, पंजाब, भारत के राष्ट्रपति से गुहार लगायी है की मामले की जाँच सीबीआई से करवाई जाये अन्यथा उन्हें इच्छा मृत्यु दे दी जाये |