मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया अंतरिम बजट अगले चुनावों में अपनी डूबती नैया को बचाने का जुमला मात्र: हरियाणा कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अशोक बुवानीवाला

चंडीगढ़, 1 फरवरी। मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया आज अंतिम अंतरिम बजट अगले चुनावों में अपनी डूबती नैया को बचाने का जुमला मात्र है। ये बात हरियाणा कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता एवं मुख्यमंत्री के पूर्व मीडिया कॉर्डिनेटर अशोक बुवानीवाला ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कही। बुवानीवाला ने कहा कि बजट में वोट बटोरने लिए सपने तो दिखाऐ गए पर परन्तु ये नहीं बताया गया कि ये सपने पूरे कैसे होंगे। मोदी सरकार ने फसलों पर एमएसपी बढ़ाने के नाम पर किसानों को ठगने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि 4 एकड़ भूमि के किसान से 6000 रूपए का वादा तो किया, लेकिन मोदी सरकार ने डीजल, खाद्य, बीज, कीटनाशक की कीमतें बढ़ाकर एवं कृषि उपकरणों पर जीएसटी लगाकर 4 एकड़ भूमि के स्वामित्व वाले किसान पर पहले ही लगभग 24000 रूपए तक का बोझ डाल रखा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस तरह 4 एकड़ भूमि वाले किसान से मोदी सरकार 24000 रूपए वसूलकर 6000 रूपए दे रही है। मतलब किसान से 18000 रूपए तो फिर वसूले जा रहे हैं। बुवानीवाला ने कहा कि राफेल घोटाला छिपाने के लिए देश की सुरक्षा के नाम पर हर रोज जनता को गुमराह करने वाले मोदी जी ने रक्षा बजट पर अपनी पीठ तो थपथपा ली लेकिन ये नहीं बताया कि वृद्धि मात्र 15000 करोड़ रूपए की है। क्योंकि रक्षा बजट पहले से ही 2.85 लाख करोड रूपए है, जिसे बढ़ाकर 3 लाख करोड़ किया है। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र के दस करोड़ श्रमिकों को 36000 रूपए सालाना पेंशन देने का एलान भी जुमला मात्र है। क्योंकि इस योजना का कुल बजट 3.60 लाख करोड़ रूपए है और पैसा आवंटित मात्र 500 करोड़ रूपए का किया गया है। बुवानीवाला ने कहा कि मोदी सरकार राजकोषीय घाटे के अपने लक्ष्य से फिर चूक गयी है। मोदी सरकार घोषणाएं तो रोज करती है लेकिन ये नहीं बताती पैसा कहा से आएगा। उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल से हर वर्ग के दु:ख दर्द को दरकिनार कर तानाशाही करने वाले मोदी जी अपनी सत्ता बचाने के लिए संसद पटल का इस्तेमाल करके लोक लुभावन घोषणाऐं कर रहे है जबकि सरकार महज चंद दिन की बची है। ये अंतरिम बजट किसी प्रकार के फैसले लेने के संविधानिक अधिकार नहीं रखता क्योंकि आम चुनावों के बाद आने वाली नई सरकार आम बजट पेश करके फैसले ले सकेगी।