र्प्यावरण मैत्री जैविक कीटनाशक उत्पाद हुये लांच

चंडीगढ़- भारत सरकार के देश में रसायन मुक्त खेती के प्रयासों को मजबूती देने की दिशा में जहां एक ओर कृषि समाज इस ओर जागरुक हो रहा है वहीं दूसरी तरफ उत्पादक भी रसायन युक्त कीटनाशकों से किनारा कर किसानों को व्यापक विकल्प प्रदान करवा रहें है।

अल्बाटा बायोटैक के यह उत्पाद फल, फूलों और  सब्जियों की 350 किस्मों पर होंगें कारगर सिद्ध

इसी कड़ी में अल्बाटा बायोटैक ने अपने नये उत्पादों को लांच कर किसानों को र्प्यायवरण मैत्री जैविक कीटनाशकों की पेशकश की है।  हिमाचल के जाने माने लोक गायक विक्की चौहान ने कंपनी प्रबंधको की मौजूदगी में यह उत्पाद लांच किये ।

आज चंडीगढ़ प्रेस कल्ब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान अल्बाटा बायोटेक के प्रबंध निदेशक गुरप्रीत सिंह ने बताया कि लांच किये गये चार उत्पाद – रॉयल सुपर ग्रो, रॉयल लार्वऐंड, रॉयल क्लियर माईट, रॉयल नेमा ‘ब्रॉड स्पैक्टर्म’ तथा ‘कोनटेक्ट’ अधारित उत्पाद हैं जो कि फल, सब्जियों, फूलों सहित सभी प्रकार के वनस्पतियों की करीब 350 किस्मों के लिये कारगर सिद्ध होंगें ।

उन्होंनें बताया कि लांच किये गये सभी उत्पाद गहन शोध के बाद बाजार में उतारे गये हैं जो कि विभिन्न देशव्यापी ओर्गेनिक प्रमाणित ऐजेंसियों जैसे नैचुरल ओर्गेनिक सर्टिफिकेशन ऐग्रो (नोका), ‘सात्विक इंडिया कौंसिल’, आईएसओ  9001:2015 और ‘करुशि सर्टिफाइड प्रमाणित है।इस अवसर पर मौजूद कंपनी के हिमाचल के वितरक (माध्यम इंटरप्राईसिस) अरुण वर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश मे सरकार के इन उत्पादों के खरीद फरोख्त की खुली अनुमति  देदी है जिससे की हिमाचल प्रदेश, सिक्किम के बाद जैविक प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है।

गुरप्रीत सिंह ने बताया कि पूर्ण रुप पौधों से निकाले गये घोल में रॉयल सुपर ग्रो फसल की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है और पौधों के लिये आवश्यक सभी जमीनीं पौष्टिकताओं की पूर्ति करने में सक्षम है जबकि रॉयल लार्वऐंड, लार्वा के अंडे देने से पहले ही कीट का विनाश कर फसल को सुरक्षित रखती है । यह पूरी तरह से बायो डिग्रेडिबेल सोल्यूशन हे जो कि मात्र 48 घंटों से पहले ही अपनी प्रभाव दिखाना शुरु कर देती है तथा 250 प्रकार की सूंडियों का खात्मा कर देती है। एक अन्य कीटनाशक रॉयल क्लियर माईट मकौडों, झींगुरों, कीटों, ब्लैक फ्लाई आदि अन्य प्रकार के कीटों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है जबकि रॉयल नेमा पौधों की विभिन्न प्रकार की बीमारियों से लड़ने में सहायक सिद्ध होगा। यह कीटनाशक बड़े बड़े खेतों, जंगलों, बागवानी, फ्लोरीकल्चर, बगीचों और किचन गार्डन्स में उपयोगी साबित होगा।
गुरप्रीत ने बताया कि विश्व स्तरीय शोध के आंकड़े बताते है कि रसायन युक्त फसले धीरे धीरे शरीर में अस्थमा, कैंसर, पार्किसन, डिप्रैशन, हाईपर एक्टिव डिस्आर्डर को जन्म देता है जो कि बाद में घातक हो जाते हैं। उन्होंनें इस बात पर बल दिया कि कृषि जगत में ‘ग्रीन रेव्यूलूशन’ के बाद अब ‘ओर्गेनिक रेव्यूलूशन’ की जरुरत है जो कि जैविक कीटनाशकों के उपयोग से ही संभव हो पायेंगें।