वित्त मंत्रालय में मीडिया पर पाबंदी के खिलाफ पत्रकारों ने किया वित्त मंत्री के रात्रिभोज का बहिष्कार।

नई दिल्ली – प्रत्येक वर्ष बजट के बाद वित्त मंत्री की तरफ से एक रात्रिभोज का आयोजन होता है जिसमें वित्त मंत्रालय कवर करने वाले यानि आर्थिक मामलों को रिपोर्ट करने वाले पत्रकारों को आमंत्रित किया जाता है। इस वर्ष भी शुक्रवार को रात्रिभोज का आयोजन हुआ था लेकिन पत्रकारों ने इस रात्रिभोज का बहिष्कार किया था। वजह वही .. वित्त मंत्रालय में पत्रकारों के प्रवेश पर पाबंदी। दो तीन पत्रकार गए थे, कोई बता रहा था कि उनके ऑफिस पर बहुत दबाव था। पत्रकारों ने जो हिम्मत दिखाई है उसके लिए वे बधाई के पात्र हैं।

जो पत्रकार नहीं हैं उन्हें लगता होगा कि मोदी सरकार ने ठीक किया है, पत्रकारों को मंत्रालयों में जाने की जरूरत क्या है?

आइए समझते हैं कि पत्रकारों को मंत्रालय में जाने की जरूरत क्या है और इस पाबंदी का मतलब क्या है? राजनीतिक पार्टियों की पत्रकारिता और सरकार की पत्रकारिता दोनों अलग अलग होती है। राजनीतिक पार्टियों की पत्रकारिता पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और नेताओं द्वारा दी गयी जानकारी पर आधारित होती है जो केवल राजनीतिक पार्टी के हित में होती है। उससे आम आदमी के सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है। आम आदमी के सेहत पर असर डालने वाली पत्रकारिता होती है सरकार और सरकार की नीतियों वाली पत्रकारिता। और सरकार नीतियों में कमी या उसकी असफलता से जुड़ी हुयी कोई बात आपतक नहीं आने देना चाहती। उस सूचना को पाने/ निकालने के लिए पत्रकारों को बहुत कोशिश करनी पड़ती है। रिपोर्टर मंत्रालयों में जाते हैं , अधिकारियों से मिलते हैं । उन्हीं अधिकारियों में से कोई नाम न बताने की शर्त पर रिपोर्टर को जानकारी दे देते हैं जो आपके हित से जुड़ी होती है। और अगले दिन टीवी या अखबार में ‘सूत्रों से मिली जानकारी’ के आधार पर खबर आप तक तक पहुँचती है।

अब ऐसी कोई खबर आपतक नहीं पहुंचेगी। क्योंकि अब वित्त मंत्रालय में कोई भी पत्रकार बिना किसी अधिकारी के बुलावे के अंदर नहीं जा सकेगा ( पहले PIB कार्ड वाले पत्रकार मंत्रालय के गेट पर अपना कार्ड दिखाकर जा सकते थे)। जब कोई अधिकार किसी रिपोर्टर को बुलायेगा तो रजिस्टर में उसकी इंट्री होगी कि किस अधिकारी ने बुलाया था। अगले दिन अगर उस रिपोर्टर ने ‘सूत्रों से मिली जान