वैरिकोज नसों की समस्या पैरों और जांघों में सबसे आम: विशेषज्ञ

मोहाली, 5 जनवरी: ‘‘जब नसों में रक्त का प्रवाह ठीक  से नहीं होता है तो उनमें रक्त के थक्के जमने से उनका आकार बढ़ जाता है। वैरिकोज वेन्स होने पर, इनको उभरा या सूजा हुआ साफ देखा जा सकता है और इस समस्या से जुड़े प्रमुख लक्षणों में लगातार थकावट, भारीपन या टांगों में दर्द बने रहना आदि शामिल है। गंभीर मामलों में वैरिकोज नसें फट सकती हैं या खुले घाव (अल्सर) हो सकते हैं जो त्वचा पर बन सकते हैं। वैरिकोज वेन्स की समस्या पैरों और जांघों में सबसे आम है।’’
डॉ.श्रीनाथ राठौड़, कंसल्टेंट, जनरल एंड वैस्कुलर सर्जरी ने आज आईवी हॉस्पिटल, मोहाली में ‘ वैरिकोज एंड स्पाइडर वेन्स’ पर आयोजित एक इंफॉर्मेटिव टॉक कहा कि स्माल स्पाइडर वेन्स कई बार त्वचा की सतह पर भी दिखाई दे सकती हैं। ये छोटी, फाइन लाइंस, स्टारबस्र्ट क्लस्टर या मकड़ी के जाले यानि वेब-जैसे भूलभुलैया की तरह लग सकते हैं। जांघों, टखनों और पैरों में स्पाइडर वेन्स सबसे आम हैं। वे चेहरे पर भी दिखाई दे सकते हैं। डॉ.राठौड़ ने कहा कि इनको लेकर सतर्क रहना चाहिए।
वैरिकोज और स्पाइडर वेन्स किसी भी उम्र के पुरुषों या महिलाओं में हो सकती हैं, लेकिन ये सबसे आम या बार-बार लंबे समय तक खड़े रहकर काम करने वाले लोगों,  मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति, किसानों, पुलिस और सेना के जवानों, मेडिकल सेक्टर के लोगों के अलावा गर्भवती महिलाओं या बुजुर्गों को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों और बढ़ती उम्र के लोगों में भी वैरिकोज वेन्स और स्पाइडर वेन्स का जोखिम अधिक हो सकता है।
वैरिकोज और स्पाइडर वेन्स के कारणों के बारे में बात करते हुए, डॉ. राठौड़ ने कहा कि वैरिकोज और स्पाइडर वेन्स के कारण नसों में वाल्व की अनुपस्थिति या कमजोरी होती है जो हार्ट से शरीर के निचले हिस्से में आने वाले रक्त के प्रवाह को रोकती हैं। रक्त प्रवाह में किसी अन्य समस्या के कारण भी ये समस्या हो सकता है। अन्य मामलों में, नसों की वाल्स में कमजोरी रक्त के पूलिंग का कारण हो सकती है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में ये रोग धमनियों में किसी अन्य रोग या फेलबिटिस या जन्मजात असामान्यताओं के कारण भी हो सकता है। नसों संबंधित रोग आम तौर पर आगे बढ़ते रहते हैं और इनको पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है।
इसके उपचार के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि वैरिकोज और स्पाइडर वेन्स शुरू में एक कॉस्मेटिक समस्या हो सकती हैं। लेकिन वैरिकोज वेन्स के लंबे समय तक चलने वाले मामलों में अल्सर, त्वचा का रंग बदल जाना, ब्लीडिंग, डीप वेन्स थ्रोम्बोसिस, टांगों में सूजन आदि के लिए आमतौर पर उपचार की आवश्यकता हो सकती है। यदि आप इनको लेकर कुछ तय नहीं कर पा रहे हैं तो डॉक्टर से जांच कराएं।
डॉ.राठौड़ ने बताया कि आईवी हॉस्पिटल में वैरिकोज और स्पाइडर वेन्स के इलाज के लिए अलग अलग प्रोसेसज उपलब्ध हैं। वैरिकोज वेन्स के लिए हमारे पास आईवी में एक नया ट्रीटमेंट भी है, जिसे लास्ट थेरेपी के रूप में डिजाइन किया गया है। इसे वैरिकोज के एक दिन के प्रोसीजर में किए जाने वाले उपचार के तौर पर भी देखा जाता है, जिसमें कोई निशान भी नहीं पड़ता है। वहीं मरीज की हालत के आधार पर मरीज को दर्द आदि भी नहीं होता है।