“संविधान सत्याग्रह आंदोलन”: भारत भूमि बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में हजारों किसानों ने किया मोन व्रत

चण्डीगढ़, बहादुरगढ़, निलौठी, 22 जनवरी: “संविधान सत्याग्रह आंदोलन” के आठवें दिन, चौधरी रमेश दलाल अध्यक्ष भारत भूमि बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में हजारों किसानों ने दुसरे भी मोन व्रत किया और रमेश दलाल सहित लगभग आधादर्जन किसानों ने गांव निलौठी में भू समाधी जारी रखी। रमेश दलाल राष्ट्रीय अध्यक्ष  ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व सभी सक्षम अधिकारियों से इच्छामृत्यु की लिखित में अनुमति मांगी। उन्होंने कुछ लोक सेवकों और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को अराजक समाज (जंगल राज) को बढ़ावा देने के लिए दोषी होने का आरोप लगाया।

यहाँ जारी एक बयान में रमेश दलाल ने कहा की एसआईए का अध्ययन नहीं करने के लिए मुआवजे की अतिरिक्त राशि का भुगतान करने के लिए वैधानिक प्रावधानों के अनुसार सभी पूर्वोक्त परियोजनाओं में अध्ययन करते हैं और इसमें सभी लागू घटकों के अनुसार मुआवजे की राशि का भुगतान करते हैं। MORTH सहित लोक सेवकों पर गलत तरीके से मुकदमा चलाने के लिए धारा 197 CRPC के तहत पिछली मंजूरी देने के लिए क्योंकि उन्होंने जानबूझकर भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को नुकसान पहुचाने के लिए अपराधिक  के लिए एक बड़ी साजिश के तहत आपराधिक अपराध किया था।  रमेश दलाल ने कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कार्यकाल के दौरान किए गए सभी एनएच परियोजनाओं के उचित ऑडिट के लिए सीएजी को मामले को संदर्भित करने के लिए।  परियोजनाओं के चयन, संरेखण को ठीक करने और EPC मोड के तहत निजी ठेकेदारों के चयन के संबंध में उचित सुझाव लेने के लिए नितिन गडकरी ने MORTH और NHAI को छोटे टुकड़ों में परियोजनाओं के विभाजन के रूप में MORTH और NHAI व्यय मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया है।

रमेश दलाल ने बताया कि टेंडर देने से पहले कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) और अन्य सक्षम प्राधिकारियों से अनुमोदन नहीं लिया और इस तरह उन्होंने सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया जिससे कुछ सड़क ठेकेदारों को लाभ हुआ और इस तरह सार्वजनिक धन की हानि हुई।  (के) इच्छामृत्यु के लिए अनुमति देने का अनुरोध उक्त के रूप में किया जाता है यदि कोई विधिसम्मत कार्रवाई या संवाद लोकतांत्रिक तरीके से शुरू नहीं किया जाता है।

इस अवसर पर बीकानेर से दोनों पैरों से अपाहिज जेठाराम ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा की वे भू समाधी लेकर बैठे हुए हैं जब तक सरकार उनकी जमीन का हक़ उन्हें देती है तब तक वे भू समाधी पर ही बैठे रहेंगे।