हरियाणा के सभी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों की आधी फीस माफ की जाने की मांग: हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अशोक बुवानीवाला

रोहतक, 29 जुलाई। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अशोक बुवानीवाला ने कोरोना महामारी के दौरान कक्षाएं न लगने और प्रदेश की जनता के विषम आर्थिक हालात के दृष्टिगत हरियाणा के सभी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों की आधी फीस माफ की जाने की मांग की है। बुवानीवाला ने कहा कि हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार द्वारा साजिश के तहत प्रदेश के युवाओं को प्रताडि़त किया जा रहा है। उन्होंनें कहा कि प्रदेश में सभी सरकारी और गैर सरकारी कॉलेज व विश्वविद्यालय कोरोना महामारी के चलते बंद हैं, परंतु हरियाणा की खट्टर-चौटाला सरकार ने गैर जिम्मेदाराना, संवेदनहीन और युवा विरोधी फरमान जारी करते हुए विद्यार्थियों से फीस व सभी प्रकार के फंड वसूलने के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि महामारी के ऐसे भयावह माहौल में सरकार विद्यार्थियों को प्रताडि़त करना बंद करना चाहिए और सभी विद्यार्थियों की आधी फीस माफ की जाए। बुवानीवाला ने कहा कि सरकार को विद्यार्थियों के हितों से तो कोई लेना देना नहीं है, लेकिन अपना कोष भरने के लिए पूरी फीस लेने के फरमान जारी किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश की पहली सरकार है, जिसने कोरोना महामारी में आर्थिक रूप से परेशान हो चुकी प्रदेश की जनता को राहत पहुंचाने की बजाए, उनके लिए हर रोज कोई नयी आफत पैदा की है। फीस माफी के मुद्दें के साथ बुवानीवाला ने एचटेट की वैधता बढ़ाने और जेबीटी भर्ती प्रक्रिया तुरंत आरंभ करने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि भाजपा-जजपा सरकार ने पिछले छह वर्ष में जेबीटी भर्ती के लिए एचटेट परीक्षाएं तो बार-बार आयोजित की लेकिन जेबीटी भर्ती एक बार भी नहीं की, जिससे 90 हजार एचटेट पास करने वाले युवाओं की एचटेट परीक्षा की वैधता बिना जेबीटी भर्ती प्रक्रिया में भाग लिए बिना ही समाप्त होने के कगार पर है। प्रदेश बेरोजगारी के मामले में पूरे देश में प्रथम स्थान पर है लेकिन सरकार विद्यार्थियों और बेरोजगार युवाओं को प्रताडि़त करने का कोई अवसर नहीं छोड़ रही है। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार ने बकायदा कोर्ट में हलफनामा देकर 5 हजार 695 पदों पर जेबीटी भर्ती करने की बात मानी थी, लेकिन आज तक भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, जिससे एक तरफ बेरोजगार युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है और दूसरी तरफ छात्रों को सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का अभाव झेलना पड़ रहा है।

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