हरियाणा राज्य के सभी जिलो में 19 जनवरी को आगामी पोलियो उन्मूलन चलाया जाएगा अभियान

पंचकुला: स्वास्थय विभाग, पंचकुला ने जिला स्तर पर आगामी पोलियो अभियान को लेकर सभी चिकित्सा अधिकारियों की कार्यशाला आयोजित की और बताया कि हरियाणा राज्य के सभी जिलो में 19 जनवरी को आगामी पोलियो उन्मूलन अभियान चलाया जाएगा और इस दौरान बच्चों को 2 बूंद जिंदगी की यानी पोलियो वायरस से बचाने के लिए ड्रॉप्स पिलाई जाएंगी । डॉ योगेश शर्मा, सिविल सर्जन, पंचकुला ने बताया कि हालांकि पांच साल से भारत पोलियो से मुक्त है परंतु कुछ पड़ोसी देशों में पोलियो वायरस पॉजिटिव रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और उनसे हमारे नोनिहालों में संकर्मण का खतरा बना रेहता है इसलिए बच्चों को पोलियो कि दवा बार-बार पिलाना अतिआवश्यक है । बैठक में डॉ मीनू सासन, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी के साथ-साथ सभी चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे । अभियान के दौरान  जिले में शून्य से पांच वर्ष तक के लगभग 72537 (Rural-42843, Urban-29694) बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए उन्होंने विभाग द्वारा किये गये इंतजामों की समीक्षा करते हुए बताया की इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिले में 513 (Rural-348, Urban-165) तय बूथ, 23 (Rural-20, Urban-3) मोबाइल टीमें और 24 (Rural-13, Urban-11) ट्रांजिट टीमों का गठन किया गया है, और इसमें लगभग 1564 स्वास्थ्य कर्मियों, स्वयंसेवकों, आंगनवाड़ी श्रमिक और स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) द्वारा भाग लिया जा रहा है ।

पोलियो रोकथाम के लिए यह कदम उठा रहा है विभाग

जिस किसी एरिया में 15 साल से कम उम्र के बच्चे में अपंगता जैसे चलने-फिरने में असमर्थता, कमजोरी, हाथ-पैरों का ढीला होना, इन अंगों का काम न करने का केस मिलता है तो स्वास्थ्य टीम वहां पहुंचकर जांच करती है। वायरस संदिग्ध बच्चे के स्टूल का सैंपल एएफपी टेस्ट के लिए नॉर्थ इंडिया की लैब कसौली में भेजा जाता है। वहां से एक माह बाद रिपोर्ट आती है। तब तक केस को पॉजिटिव मानते हैं। उसके आसपास के 50 बच्चों को फिर से पोलियो की खुराक दी जाती है। इसे रिंग इम्यूनाइजेशन कहा जाता है, ताकि वायरस सक्रिय न रहे और अन्य बच्चे चपेट में न आएं

2014 में मिला था पोलियो मुक्त का सर्टिफिकेट

2011 के बाद देश में कहीं भी पोलियो ग्रस्त केस सामने नहीं आया। 2014 में देश को पोलियो मुक्त का सर्टिफिकेट भी मिला लेकिन पाकिस्तान व अफगानिस्तान में वायरस की सक्रियता देखकर भारत सहित उनसे सटे देशों ने मॉनिटरिंग के साथ इम्यूनाइजेशन सिस्टम में परिवर्तन करके उसे और व्यापक बनाया। हजारों की बजाए अब लाखों बच्चों के स्वास्थ्य की जांच होती है। इसके साथ ही पी 1 और पी 3 वायरस से डबल सुरक्षा के तहत ओपीवी की खुराक और आईपीवी इंजेक्शन लगाया जाता है। बच्चों को अन्य बीमारियों से बचाने के लिए इम्यूनाइजेशन सिस्टम में सुधार किया है।