हरियाणा राज्य स्तरीय फुड फोर्टिफिकेशन, सेफ्टी एण्ड न्यूट्रिशन पर इंडियन इंस्टीच्यूट आफ हैल्थ मैनेजमेंट रिसर्च जयपुर के  सौजन्य से आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला जिला पंचकूला में

पंचकूला, 28 जनवरी। प्रधान सचिव माध्यमिक शिक्षा डा. महाबीर सिहं ने कहा है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी मिड डे मील योजना को एक मुहिम के तौर पर लें और इसे अपनत्व से जोड़ें ताकि प्रदेश के बच्चों विशेषकर लड़कियों को शारीरिक और बौद्यिक रूप से मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि हम इस योजना को सामाजिक जिम्मेवारी के साथ चलाएगंे तो सरकारी धन का पूर्ण भागीदारी के साथ इस्तेमाल होगा और इस क्रियान्वयन भी ओेर ज्यादा कारगर ढंग से होगा।
प्रधान सचिव राज्य स्तरीय फुड फोर्टिफिकेशन, सेफ्टी एण्ड न्यूट्रिशन पर इंडियन इंस्टीच्यूट आफ हैल्थ मैनेजमेंट रिसर्च जयपुर के  सौजन्य से आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे। इस कार्यशाला में प्रदेशभर के 300 से अधिक जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खण्ड शिक्षा अधिकारियों के अलावा हैफेड, वीटा, महिला एवं बाल विकास के अधिकारियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि मिड डे मील में बच्चों को दी जाने वाली रेसीपी में शीघ्र ही तबदीली की जाएगी ताकि बच्चों को ओर ज्यादा पोष्टिक एवं प्रोटीनयुक्त आहार मिल सके। इसमें बच्चों को लगातार 6 दिन तक दूध मुहैया करवाया जाएगा। इसके अलावा कोई सुझाव भी आएगें उन्हें भी लागू किया जाएगा ताकि कोई दिक्कतें पेश न आए।
प्रधान सचिव ने कहा कि हमें इस तरह के प्रयास करने चाहिए जिससे लोगोे को स्कीम की समझ हो सके और बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार उपयोगी भी समझा जा सके। उन्होंने कहा कि बारीकि से स्कीम के कर्तव्यों के बारे लोगों को बताएगें तो धरातल पर स्कीम का सही लाभ मिल सकेगा। आर्थिक रूप से सम्पन्न हरियाणा, पंजाब जैसे प्रान्तों में 40 से 42 प्रतिशत तक बच्चों का कुपोषण से ग्रस्त होना वास्तव में चिंता का विषय है। जिसके कारण बच्चे अनिमिया से ग्रस्त हो रहे है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार हम रोजमर्रा की दौड़धूप से पीछे रह जाएगें और सही समय पर पर्याप्त मात्रा में पोष्टिक आहार नही मिलेगा तो महिलाओं की दर मे ंभी कमी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रगतिशील एवं श्रमदान के क्षेत्र में अग्रणीय प्रदेश में इस तरह की स्कीमों का क्रियान्वयन ओर अधिक रूचिकर बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए ताकि स्कूलों में बच्चों की संख्या बढे और ड्राप आउट कम हो तथा बच्चांें का लगातार आना भी बना रहे। इस प्रकार स्कीम में रूझान बढने से शिक्षा में भी सुधार होगा और बच्चों का स्वास्थ्य भी तंदरूस्त होगा।
डा. महाबीर ने कहा कि मिड डे मील योजना 371 करोड़ रुपए की लागत से क्रियान्वित की जा रही है जो सबसे बड़ी स्कीम है। इस स्कीम में प्रदेश के साढे 14 लाख बच्चों को कवर किया जा रहा है। प्रदेश के स्कूलों में लागू इस योजना के तहत सभी बच्चों को प्रोटीन, कैल्शियम, कैलोरी, मिनरल्स, विटामिन से भरपूर स्वादिष्ट भोजन मिले इसके लिए सभी जिला स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों को समय समय पर निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए ताकि इसकी गुणवता में ओर ज्यादा सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि खाने में फोर्टिफिकेशन बढाने के साथ पेट के कीड़े मारने की एलबेंडाजोल टेबलेट दी जा रही है। इसके अलावा आयरण की कमी दूर करने के लिए बच्चों को फोलिक एसिड टेबलेट दी जा रही है ताकि बच्चों में कुपोषण में कमी लाई जा सके।
प्रधान सचिव ने मिड डे मील योजना में सराहनीय कार्य करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को सम्मानित किया।
निदेशक माध्यमिक स्कूल शिक्षा प्रदीप डागर ने कहा कि मिड डे मील योजना के तहत 6 जिलों में फोर्टिफिकेशन युक्त आटा मुहैया करवाया जा रहा है। इसके अलावा डबल टोंड युक्त नमक एवं दूध भी दिया जा रहा है ताकि बच्चों को थायराईड जैसी बीमारियों से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जिम्मेवारी के साथ इस योजना में कार्य करना चाहिए। मौलिक शिक्षा ही बच्चों के सम्पूर्ण स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। यदि प्राथमिक शिक्षा सही होगी तो बुनियाद मजबूत होगी और बच्चों का जीवन ओर ज्यादा बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 14400 स्कूलो में 11000 से अधिक माध्यमिक स्कूल है। इन स्कूलों में खाने की कमी को दूर करने का प्रयास करेगें तो शिक्षा के क्षेत्र में अतुल्यनीय सुधार होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों विशेषकर डीईईओ, बीईओ को इस यज्ञ में पूर्ण आहूति डालनी चाहिए और इसे समाज सेवा के रुप में सेवा समझकर करनी चाहिए।
अतिरिक्त निदेशक डा. वन्दना दिसोदिया ने कहा कि प्रदेश के 2381 स्कूलों में किचन गार्डन स्थापित किए गए है तथा शीघ्र ही सभी स्कूलो में स्थापित किए जाएगें। उन्होंने कहा कि मिड डे मील को शिखर तक ले जाने के लिए विभाग प्रयासरत है। कार्यशाला में फोर्टिफाईट खाद्य सामग्री के प्रयेाग पर पूरा बल दिया गया। फोर्टिफिकेशन के अनेक लाभ है तथा इस पर ज्यादा खर्च भी नहीं आता। कार्यशाला को प्रोजेक्ट डायरेक्टर डा. पी आर सुडानी, संजीव कुमार, रूचि गोयल, डा. गिरीश, कीर्ति अग्रवाल, सधीश जैन,के के यादव, वाई पी सिंह, योगेन्द्र सिहं, सपना ने अलग अलग विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।