१२५ वीं विनोबा जयन्ती पर आयोजित हुआ समारोह

चण्डीगढ़ः- भारत रत्न संत विनोबा भावे जी की १२५ वीं जयंती के अवसर पर आज गांधी स्मारक भवन सैक्टर-१६  के सभागार में एक समारोह आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता गांधी स्मारक निधी के अध्यक्ष के.के.शारदा ने की तथा मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध इतिहासकार डा.एम.एम. जुनेजा उपस्थित थें।

कार्यक्रम के आरम्भ में कंचन त्यागी ने विनोबा जी का प्रिय भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डा. देवराज त्यागी ने बताया कि विनाबा जी द्वारा रचित गीता प्रवचन का अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ और वह लोगों में बहुत प्रसिद्ध हुई। विनोबा जी ने कहा था कि राजनिति और विज्ञान मिलकर सर्वनास करते हैं तथा आध्यात्मिकता और विज्ञान मिलकर सर्वोदय।

वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रेम विज ने विनोबा जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे श्रम में विश्वास रखते थें और प्रति दिन सूत कातने का कार्य करते थें तथा उसी से तैयार कपड़ा पहनते थे।

मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रसिद्ध इतिहासकार डा.एम.एम. जुनेजा ने बताया कि विनोबा जी पढ़ाई में बहुत होशियार थें और वे अनेक भाषाओं के ज्ञाता थें। उन्होनें कहा कि वे सच्चे अर्थों में गांधी जी के अनुयायी थें।

अध्यक्ष के रूप में बोले हुए के.के.शारदा ने कहा कि बड़े खेद की बात है कि आज सभी राजनैतिक दल इन महापुरूषों की कुर्बानियों को भुला बैठे है जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश सेवा में लगा दिया।

इस अवसर पर अनेक साहित्यकार, आचार्यकुल के पदाधिकारी जिनमें डा.एम.पी.डोगरा, डा.सुभाष गोयल, कंचन त्यागी, डा. प्रज्ञा शारदा, डा. दलजीत कौर, अमनदीप सिंह, रमेश बल, पापिया चक्रवर्ती, सुमन बेरी, गुरप्रीत, आनन्द राव, अमित, दीपक तथा धरमिन्दर आदि उपस्थित थें।

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