21 दिनों में इम्युनिटी बढा कर  देश से करोना का खात्मा हो सकता है – डॉ खादर वली

 


चण्डीगढ़: कोविड-19 से बचने हेतु इम्युनिटी बढाने के लिये चीनी व दूध छोड़ दीजिए, सूर्य नमस्कार करें व मोटे अनाज (कंगनी व कोदरा)  का सेवन करें, व गिलोय, दवाना (माची पत्र), पारिजात (हरसिंगार) एवं अमरूद के पतों का  काढ़े का तथा मोटे अनाज (कंगनी व कोदरा)  का सेवन करें। ये कहना है मिलेट मैन ऑफ़ इंडिया के नाम से प्रख्यात चिकित्सक डॉ. खादर वली का। उन का कहना है कि मनुष्य के पास अपना लाइफ स्टाइल बदलने को केवल 30 साल बचें है वरना 48 सालों बाद जीवन नहीं बचेगा। उनके मुताबिक यदि हम चाहते हैं कि हमारी भावी पीढ़ी जीवन देख पाए तो पर्यावरण का सम्मान व अपना जीवन पेड़ों के आस पास केंद्रित करना होगा। इसलिए पहले पेड़ लगाएं, फिर घर बनायें। कालोनाइजर्स को  भी नया मॉडल फॉलो करना होगा।
सिरिधान्य ( पॉजिटिव मिलेट , कंगनी , सान्वा, कोदरा, कुटकी , छोटी कंगनी ) के सेवन से लगभग सभी बिमारियों से मुक्ति मिलती है

डॉ खादर वली जीवन जीने की कला सिखाने के लिए *हैल्दिएस्ट लाइफ स्टाइल* विषय पर लाइव सेशन के जरिये चंडीगढ़ के पूर्व अस्सिटेंट प्रोफेसर होम्योपैथी व लाइफ स्टाइल एक्सपर्ट डॉ. एचके खरबंदा के साथ आम जनता के साथ जुड़े हुए थे। उनका मानना है कि इंडस्ट्रियल फ़ूड कल्चर से हम बीमारियों को बढ़ावा दे रहे है वैज्ञानिक भी झूठ बोल कर इसमें अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पनीर हमारे लिए अच्छा नहीं है। सिर्फ पनीर छोड़ने से कुल बीमारियों की संख्या आधी रह जाएंगी। 60 साल पहले प्रचलित खाद्य पदार्थों, बर्तनों व अनाज को भिगोने की प्रथा फिर से अपनानी  होगी। अंग्रेजों  ने बंगाल की पाम जैगरी से प्रेरित हो चीनी बनाई थी। इस चीनी नामक जहर ने बीमारियों के जरिये हम सब को अपना गुलाम बना लिया है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में बच्चे रोजाना औसतन 500 ग्राम चीनी इस्तेमाल करते हैं वहीँ भारत में भी ये औसत 50 ग्राम है।

उन्होंने शोध कार्य करके पाया कि सिरिधान्य ( पॉजिटिव मिलेट , कंगनी , सान्वा, कोदरा, कुटकी , छोटी कंगनी ) के सेवन से लगभग सभी बिमारियों से मुक्ति मिलती है।  डॉ खादर वली ने इस दौरान कोरोना, मधुमेह, मोटापा, पिसीओडी आदि बिमारियों के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने कहा कि 21 दिनों में देश से करोना का खात्मा हो सकता है।
इस मौके पर उन्होंने कुछ बीमारियों के लिए उपचार भी सुझाये व हेल्थ टिप्स भी दिए।  उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि 250 से 400 एम एल गाजर, चुकन्दर व अमरूद का जूस 21 दिनों में हेमोग्लोबिन बढ़ा देता है व एनीमिया से राहत मिलती  है। आईवीएफ द्वारा पैदा हुए 38 परसेंट बच्चे ऑटिज्म से ग्रस्त हैं। मानसिक तनाव, ऑटिज्म के लिए नागदमनी का काढ़ा उपयोगी है। तिल के बीजों में 100 ग्राम में 1000 एमजी कैल्शियम होता है, जो हड्डियों के लिए अति लाभदायक है। कुटकी मिलेट हफ्ते में तीन बार व पीपल व नीम का काढ़ा बनाकर पीने से पीसीओडी में राहत मिलती है। मूंगफली के दूध व उसकी छाछ से भी फायदा मिलता है। मल्टी ग्रेन आटे की बजाय एक ग्रेन व एक लेंटिल को मिला सकते हैं। बाजरा व काला चना 5:1 के अनुपात में मिला कर आटा बना सकते हैं। चिकन को इंजेक्शन लगाकर अंडों का उत्पादन बढ़ाया जाता है, व जिमिंग के नाम पर खूब इस्तेमाल होता है लेकिन इनमें स्टेरॉइड व हार्मोन के अवशेष के नुकसान की कोई बात ही नहीं करता। हल्दी, लहसुन, काली मिर्च, अदरक का काढ़ा हर हफ्ते फेफड़ों की मजबूती व दमा में रामबाण है। खाने में कच्ची घानी के तिल के तेल, सरसों के तेल व नारियल के तेल 3-4 चमच रोजाना इस्तेमाल करें।