कृषि विज्ञान केन्द्र पंचकूला तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पंचकूला के सहयोग से बरवाला खण्ड के गांव ढण्डारडू में किसान प्रशिक्षण का किया आयोजन 

पंचकूला, 22 दिसंबर: हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि विज्ञान केन्द्र पंचकूला की समन्वयक डाॅ. श्रीदेवी के नेतृत्व में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पंचकूला के सहयोग से बरवाला खण्ड के गांव ढण्डारडू में किसान प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 50 किसानों ने भाग लिया। 

कृषि विज्ञान केन्द्र पंचकूला तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पंचकूला के सहयोग से बरवाला खण्ड के गांव ढण्डारडू में किसान प्रशिक्षण का किया आयोजन 

इस अवसर पर डाॅ. श्रीदेवी ने कहा कि परंपरागत खेती को छोड़कर एकीकृत कृषि प्रणाली को अपनाकर कृषि विभाग कृषि विकास संभव है। समय के साथ-साथ कृषि तकनीक नवीनतम कृषि क्रियाएं अपनाना आज की जरूरत है। खेती के साथ-साथ अन्य कृषि क्रियाएं जैसे पशु पालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन, रेशम उत्पादन, फलोत्पादन इत्यादि अपना नाम और अपना आर्थिक स्तर पढ़ाना ही एकमात्र विकल्प है।

कृषि अर्थशास्त्री डॉ गुरनाम सिंह ने गांव के अनुरूप उत्पादन करना ने मांग के अनुरूप उत्पादन करना और प्रसंस्करण संबंधी प्रशिक्षण ग्रहण करना हर किसान की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षित युवक युवतियों को कृषि क्षेत्र में अपना भविष्य उज्जवल करने की अपील करते हुए कहा कि समूह बनाकर प्रशिक्षण ग्रहण करके लघु स्तर पर अपना कुछ कृषि संबंधित व्यवसाय शुरू करना चाहिए।

डॉ राजेश लाठर ने फसल चक्र की फसल प्रणाली में बदलाव करके ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल जैसे फूल की खेती, मसाले वाली फसलों की खेती, सुरक्षित खेती, औषधीय पौधे की खेती आदि की तरफ किसानों का रुझान हो, इस पर जोर देते हुए कहा कि समय के साथ-साथ लय बनाकर नवीनतम कृषि तकनीक का सहारा लेकर, कृषि क्षेत्र में विकास संभव है। उन्होंने कहा कि पंचकूला जिला बागवानी की दृष्टि से बहुत ही अनुकूल है। तरह-तरह की विदेशी सब्जी व फल पैदा करके यहां की मार्केट के हिसाब से उत्पादन मुनाफे का अच्छा जरिया हो सकता है। संबंधित कृषि प्रणाली एक तरह से कृषि क्षेत्र में रिस्क को कम करती है और किसान की साल भर लगातार आय को सुनिश्चित करती है। डॉक्टर लाठर ने परंपरागत खेती को छोड़कर भगवान की तरफ अपना प्रयास करना चाहिए।