Exclusive News – डॉक्टर्स डे: अस्पताल में 19 घंटे रखी रही लाश लेकिन डाक्टरों ने नहीं किया पोस्टमार्टम

चंडीगढ़, सफीदों: सफीदों के नागरिक अस्पताल में वीरवार को सरेआम मानवता उस वक्त शर्मशार होती दिखाई दी जिस वक्त अस्पताल के डाक्टर ने एक वृद्ध के शव का पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया। वृद्ध का शव 19 घंटे अस्पताल में रखा रहा और परिजन पोस्टमार्टम के लिए डाक्टर के पीछे-पीछे रात से दोपहर तक फिरते रहे लेकिन डाक्टर का दिल नहीं पसीजा और दोपहर को डाक्टर ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि शव 10 दिन पुराना है और वह इस शव का पोस्टमार्टम नहीं कर सकते।

सफीदों के नागरिक अस्पताल में सरेआम मानवता हुई शर्मशार |

शव का पोस्टमार्टम करवाना है तो इसे रोहतक या जींद ले जाओं। परिजन व ग्रामीणों ने डाक्टर ने अनेक मिन्नतें की लेकिन नतीजा शून्य रहा। आखिरकार गुस्साएं परिजनों व ग्रामीणों ने नागरिक अस्पताल के बाहर जाम लगा दिया और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जाम की सूचना पाकर सिटी एसएचख्ओ रामकुमार मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। गौरतलब है कि कल सफीदों के वार्ड 2 निवासी महासिंह (60) उपमंडल के गांव साहनपुर के खेतों में मजदूरी करने के लिए गया था।

गुस्साए ग्रामीणों व परिजनों ने नागरिक अस्पताल में बाहर लगाया जाम |

अचानक काम करते उसका पांव फिसल गया और वह पानी में गिर गया। महासिंह की मौके पर ही मौत हो गई। एएसपी नितीश अग्रवाल व सदर थाना प्रभारी संजय कुमार मौके पर पहुंवे और महासिंह के शव को सफीदों के नागरिक अस्पताल में पहुंचाया। पुलिस ने रात में ही कागजी कार्रवाई कर दी थी। उसके बाद रात को अस्पताल के डाक्टरों ने सुबह शव का पोस्टमार्टम करने की बात कही। जाम लगा रहे परिजनों व ग्रामीणों का आरोप था कि वे शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए 8 बजे सफीदों के नागरिक अस्पताल में आ गए थे लेकिन डाक्टर ने पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू नहीं की। जिस पर उन्होंने डाक्टर से संपर्क किया तो कहा कि पोस्टमार्टम 10 बजे किया जाएगा। वे 12 बजे तक अस्पताल परिसर में भयंकर गर्मी में बैठे रहे लेकिन डाक्टरों ने शव को हाथ तक नहीं लगाया। कुछ देर बाद डाक्टर ने महासिंह के शव का पोस्टमार्टम जींद में करवाने की बात कहीं और उन्हे जींद रैफर का पर्चा थमा दिया।

पुलिस ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर हटवाया जाम |

गुस्साएं परिजनों का कहना था कि शव प्रशासन की देखरेख में कल शाम को 5 बजे ही नागरिक अस्पताल में आ गया था। अगर रैफर ही करना था तो कल ही क्यों नहीं कर दिया। आज दोपहर को डाक्टर ने यह कहकर कि शव 10 दिन पुराना है, पोस्टमार्टम करने से साफ मना कर दिया, जोकि उनके साथ सरासर अन्याय है। मृत्तक के बेटे विनोद का यह भी कहना था कि गर्मी को देखते हुए उन्होंने रात को ही बर्फ की सिल्लियां अस्पताल प्रशासन को दे दी थी लेकिन अस्पताल प्रशासन ने बर्फ को शव पर नहीं रखवाया। परिजनों का आरोप था कि यह अस्पताल पूरी तरह से खत्म है और यहां मरीजों की कोई सुनवाई नहीं है। परिजनों व ग्रामीणों ने डाक्टर को सस्पैंड करने की सरकार से मांग की।

डॉक्टर संदीप लांबा व् पुलिस ने रोपोर्ट को लेकर एक दूसरे पर झाड़ा पल्ला |

जाम की खबर पाकर सिटी एसएचओ रामकुमार मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों-परिजनों को समझाया-बुझाया और किसी तरह से मार्ग को बहाल करवाया। जाम को खोलकर परिजन शव को पोस्टमार्टम के लिए जींद ले गए थे। इस मामले में थाना प्रभारी रामकुमार का कहना था कि पुलिस ने अपनी कार्रवाई समयानुसार कर दी थी लेकिन पोस्टमार्टम करना डाक्टरों का काम है। यहां पर शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया तो शव को पोस्टमार्टम के लिए जींद भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम में देरी के कारण के बारे में डा. संदीप लांबा ने बताया कि मृतक का शव अस्पताल में बुधवार की शाम को आया था। पुलिस की कार्रवाई से पहले पोस्टमार्टम नहीं किया जा सकता। पुलिस की कार्रवाई वीरवार की सुबह करीब 11 बजे पूरी हुई। कार्रवाई होने के बाद जब शव का निरीक्षण किया गया तो शव की स्थिति सामान्य नहीं होने के कारण शव को पोस्टमार्टम के लिए जींद रैफर किया गया।